रियल एस्टेट कारोबारी की हत्या: पहचान किए बिना शव का अंतिम संस्कार करने पर गुरुग्राम पुलिस को फटकार
रियल एस्टेट कारोबारी की हत्या: पहचान किए बिना शव का अंतिम संस्कार करने पर गुरुग्राम पुलिस को फटकार
नयी दिल्ली, 24 सितंबर (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने रियल एस्टेट कारोबारी युवराज सिंह मनचंदा (31) की हत्या की जांच को लेकर बृहस्पतिवार को गुरुग्राम पुलिस को फटकार लगाई और कहा कि बिना पहचान के ही शव का अंतिम संस्कार कर जांच को ‘पूरी तरह से बिगाड़ दिया गया।’
साकेत अदालत के प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट राहुल जैन ने इस मामले के संबंध में गुरुग्राम पुलिस द्वारा सौंपी गई नयी अनुपालन रिपोर्ट पर सुनवाई के दौरान यह मौखिक टिप्पणी की।
अदालत ने कहा, ‘आपने शव का दाह संस्कार कर पूरी जांच बिगाड़ दी है।’
मनचंदा की बहन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अमित प्रसाद ने अदालत को बताया कि गुरुग्राम पुलिस द्वारा दी गई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण ‘पानी में डूबने से दम घुटना’ बताया गया है, जबकि दिल्ली पुलिस की जांच रिपोर्ट के अनुसार आरोपी ने गोली मारकर युवराज की हत्या की थी।
दिल्ली पुलिस द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार, ‘आरोपियों ने खुलासा किया कि उन्होंने युवराज सिंह मनचंदा की गर्दन पर दो गोलियां मारकर हत्या कर दी थी और इसके बाद सबूत मिटाने के लिए उन्होंने शव को गुरुग्राम में अपने घर के पास एक नाले में फेंक दिया था।’’
वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि पुलिस अधिकारी सीसीसीटीएनएस (अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क और प्रणाली) से एकीकृत ‘ज़िपनेट’ पोर्टल पर समय रहते आवश्यक विवरण अपलोड करने में विफल रहे, जिसके परिणामस्वरूप पीड़ित का परिवार अंतिम संस्कार से पहले उसकी पहचान नहीं कर सका।
‘जिपनेट’ (ज़ोनल इंटीग्रेटेड पुलिस नेटवर्क) का उपयोग कानून प्रवर्तन एजेंसियां अपराध और अपराधियों से संबंधित डेटा साझा करने के लिए करती हैं।
अदालत ने नोट किया कि 11 सितंबर को दिल्ली में प्राथमिकी दर्ज होने पर दिल्ली पुलिस ने मनचंदा की तस्वीर और अन्य ब्योरा जिपनेट पर अपलोड कर दिया था, जबकि गुरुग्राम पुलिस को बादशाहपुर के नाले से अज्ञात शव नौ सितंबर को ही मिल गया था।
हालांकि, गुरुग्राम पुलिस द्वारा एकीकृत पुलिस ‘डेटाबेस’ पर आवश्यक विवरण अपलोड करने में काफी देरी की गई। उन्होंने शव बरामद होने की जानकारी 16 सितंबर को अपलोड की, जबकि इससे दो दिन पहले (14 सितंबर) ही बिना पहचान के शव का अंतिम संस्कार किया जा चुका था। बाद में शव की पहचान मनचंदा के रूप में हुई।
मनचंदा की बहन ने अदालत का रुख करते हुए आरोप लगाया कि अंतिम संस्कार के दौरान महत्वपूर्ण फोरेंसिक सामग्री और व्यक्तिगत सामान नष्ट या प्रभावित हो सकते हैं।
इसके बाद अदालत ने गुरुग्राम पुलिस से नयी अनुपालन रिपोर्ट तलब की थी।
याचिकाकर्ता ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने और अदालत में पेश करने की मांग की है।
भाषा सुमित अविनाश
अविनाश

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