मुकदमे में समझौता होने पर अदालत फीस की वापसी वैधानिक अधिकार: दिल्ली उच्च न्यायालय
मुकदमे में समझौता होने पर अदालत फीस की वापसी वैधानिक अधिकार: दिल्ली उच्च न्यायालय
नयी दिल्ली, 24 सितंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि किसी मुकदमे या अपील का पक्षकारों के बीच निपटारा या समझौता होने पर जमा की गई अदालत फीस की पूरी वापसी एक मूल वैधानिक अधिकार है।
उच्च न्यायालय ने कहा कि अदालत फीस अधिनियम के संशोधित प्रावधानों के तहत जब मामला समझौते या सुलह के आधार पर निपटा दिया जाता है और अदालत इस संबंध में प्रमाण पत्र जारी कर देती है तो फीस वापसी के लिए अलग से आवेदन या याचिका की जरूरत नहीं होनी चाहिए।
न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति भारत पराशर की पीठ ने दिल्ली सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए जरूरी प्रशासनिक कदम उठाने का निर्देश दिया कि ऐसे सभी मामलों में अदालत द्वारा जारी प्रमाण पत्र पेश किए जाने पर समयबद्ध तरीके से अदालत फीस वापस की जाए।
पीठ ने 21 सितंबर को दिए आदेश में कहा, ‘संशोधित प्रावधान के तहत किसी मुकदमे, प्रतिदावे या अपील का निपटारा समझौते या सुलह के आधार पर होने पर जमा की गई पूरी अदालत फीस वापस पाना एक मूल वैधानिक अधिकार है। इसलिए, मामले के समझौते या सुलह के आधार पर निपटारे और अदालत द्वारा इस संबंध में प्रमाण पत्र जारी किए जाने के बाद फीस वापसी के लिए अलग से आवेदन या याचिका की जरूरत नहीं होनी चाहिए।’
उच्च न्यायालय ने यह आदेश कंपनी ‘मेसर्स हाईटेक एंटरप्राइजेज’ की ओर से एक अन्य कंपनी ‘मेसर्स मॉडर्न कंस्ट्रक्शन कंपनी’ के खिलाफ दायर अपील में अदालत फीस वापस करने की मांग वाली अर्जी पर सुनवाई करते हुए दिया। अदालत ने कहा कि पक्षकारों के बीच हुए समझौते के आधार पर अपील का निपटारा किया गया था। भाषा
शुभम नरेश
नरेश

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