धर्मांतरण राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा, कड़े राष्ट्रव्यापी कानून की जरूरत : विहिप
धर्मांतरण राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा, कड़े राष्ट्रव्यापी कानून की जरूरत : विहिप
नयी दिल्ली, 15 अप्रैल (भाषा) विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने देश में धर्मांतरण और “लव जिहाद” की कथित घटनाओं पर बुधवार को चिंता जताई और अवैध माध्यमों से धर्मांतरण पर लगाम लगाने के लिए एक सख्त राष्ट्रव्यापी कानून बनाने की मांग की।
विहिप की यह प्रतिक्रिया महाराष्ट्र के नासिक में सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी ‘टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस)’ की आठ महिला कर्मचारियों के अपने वरिष्ठों पर यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण का आरोप लगाने की पृष्ठभूमि में आई है। महाराष्ट्र पुलिस ने आरोपों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध संगठन ने दावा किया कि इस तरह की गतिविधियां बहुराष्ट्रीय संस्थानों तक फैल गई हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा के समक्ष गंभीर खतरा पेश करती हैं। उसने सभी राजनीतिक दलों से दलगत विचारों से ऊपर उठने और इस मुद्दे को सुलझाने का आग्रह किया।
विहिप के संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन ने एक बयान में कहा, “नासिक में सामने आई साजिश कोई अलग-थलग घटना नहीं है, बल्कि एक व्यापक नेटवर्क का हिस्सा है, जो विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय प्रतीत होता है। मैं केंद्र और राज्य सरकारों से अपील करता हूं कि वे किसी भी तरह की झिझक को दूर करें और राष्ट्रीय सुरक्षा, नागरिकों की सुरक्षा एवं सामाजिक सद्भाव को ध्यान में रखते हुए निर्णायक कार्रवाई करें। सभी राज्यों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी कड़े धर्मांतरण विरोधी कानूनों की जरूरत है।”
जैन ने दावा किया कि प्रभावशाली पदों पर बैठे व्यक्ति समान विचारधारा वाले लोगों की भर्ती में मदद कर रहे हैं और फिर धर्मांतरण के लिए हिंदू युवाओं को निशाना बना रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी गतिविधियां किसी एक कंपनी तक सीमित नहीं हैं और कई अन्य बहुराष्ट्रीय कंपनियों एवं शैक्षणिक संस्थानों में भी प्रचलित हो सकती हैं।
जैन ने कहा, “यह स्पष्ट हो गया है कि ऐसी गतिविधियां केवल टीसीएस तक सीमित नहीं हैं। कथित धर्मांतरण नेटवर्क गुरुग्राम, हुबली, हैदराबाद और कई अन्य शहरों की कंपनियों तथा बहुराष्ट्रीय फर्म सहित अन्य संस्थानों तक फैला हुआ प्रतीत होता है। क्या ये सभी आपस में जुड़े हुए हैं, यह एक ऐसा विषय है, जिसकी गहन जांच किए जाने की जरूरत है।”
विहिप पदाधिकारी ने ऐसी घटनाओं को लेकर जताई जा रही चिंताओं को “इस्लामोफोबिया” कहकर खारिज किए जाने के प्रयासों की भी आलोचना की।
जैन ने कहा, “ऐसा प्रतीत होता है कि यह कट्टरपंथी मानसिकता गैर-मुसलमानों को ऐसे माहौल में स्वतंत्र रूप से सह-अस्तित्व में रहने की अनुमति नहीं देती है।”
उन्होंने कहा, “धर्मांतरण की साजिश पर कई जगहों पर अमल किए जाने का अंदेशा है। अगर समाज ऐसे कृत्यों का विरोध या बहिष्कार करना शुरू कर दे, तो इसे ‘इस्लामोफोबिया’ नहीं कहा जाना चाहिए, बल्कि यह उन कृत्यों के खिलाफ प्रतिक्रिया है। सवाल यह उठता है कि क्या ऐसी परिस्थितियों में सह-अस्तित्व संभव है?”
भाषा पारुल मनीषा
मनीषा

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