दूसरों के दृष्टिकोण का सम्मान करना ही लोकतंत्र का सच्चा सार: विधानसभा अध्यक्ष

दूसरों के दृष्टिकोण का सम्मान करना ही लोकतंत्र का सच्चा सार: विधानसभा अध्यक्ष

दूसरों के दृष्टिकोण का सम्मान करना ही लोकतंत्र का सच्चा सार: विधानसभा अध्यक्ष
Modified Date: April 2, 2026 / 09:13 pm IST
Published Date: April 2, 2026 9:13 pm IST

नयी दिल्ली, दो अप्रैल (भाषा) दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने दूसरों के दृष्टिकोण के सम्मान को लोकतंत्र का सच्चा सार बताते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि वैचारिक मतभेद लोकतंत्र की कमजोरी नहीं बल्कि ताकत हैं।

भगवान महावीर के 2625वें जन्म कल्याणक वर्ष (जयंती) के उपलक्ष्य में विधानसभा परिसर में आयोजित ‘भगवान महावीर गुणानुवाद’ कार्यक्रम में विजेंद्र गुप्ता ने भगवान महावीर के ‘अनेकांतवाद’ (सत्य की बहुलता का सिद्धांत) को लोकतांत्रिक मूल्यों की आधारशिला बताया।

उन्होंने कहा कि सत्य के कई आयाम होते हैं और दूसरों के दृष्टिकोण का सम्मान करना ही लोकतंत्र का सच्चा सार है।

उन्होंने कहा कि वैचारिक मतभेद लोकतंत्र की कमजोरी नहीं बल्कि ताकत हैं, बशर्ते उन्हें सम्मान और धैर्य के साथ स्वीकार किया जाए।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने वर्तमान ‘अत्यंत कठिन परिस्थितियों’ में जैन दर्शन की प्रासंगिकता पर बल दिया।

अहिंसा के मूल सिद्धांत को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान महावीर का मार्ग केवल धार्मिक शिक्षा नहीं, बल्कि वैश्विक शांति और मानवीय गरिमा के लिए एक व्यावहारिक रोडमैप है।

उन्होंने कहा, ‘अपनी अशांति और मोह-माया में हम अक्सर सही और गलत के बीच अंतर करने की क्षमता खो देते हैं; भगवान महावीर का संयम का मार्ग ही आज हमारे लिए सच्चा मार्गदर्शक है।’

यह कार्यक्रम भगवान महावीर अहिंसा भारती ट्रस्ट’ और ‘सकल जैन समाज, दिल्ली’ के सहयोग से आयोजित किया गया।

विधानसभा अध्यक्ष ने युवाओं से आह्वान किया कि वे भगवान महावीर को केवल एक धार्मिक प्रतीक के रूप में न देखकर, उनकी शिक्षाओं को एक आधुनिक जीवन शैली के रूप में अपनाएं।

प्रज्ञा सागर महाराज ने कहा, “भगवान महावीर और हनुमान जी की तपस्या हमें जीवन जीने की कला सिखाती है।”

उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से ‘सेवा परमो धर्म:’ को अपने आदर्श वाक्य के रूप में आत्मसात करने का आह्वान किया।

जैन धर्मगुरू आचार्य लोकेश मुनि ने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के संकल्प को दोहराते हुए वैश्विक शांति का संदेश दिया और मानवता को मजबूत करने के लिए एक सूत्र में बंधने का आह्वान किया।

भाषा

नोमान प्रशांत

प्रशांत


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