शहमात The Big Debate: बजरंगबली का गदा.. किस पर होगा प्रहार? हनुमान जंयती पर छत्तीसगढ़ के नेताओं का व्यंगबाण, आखिर किस पार्टी में हैं कालनेमि जैसे नेता?

बजरंगबली का गदा.. किस पर होगा प्रहार? हनुमान जंयती पर छत्तीसगढ़ के नेताओं का व्यंगबाण, Politics in Chhattisgarh on Hanuman Jayanti

शहमात The Big Debate: बजरंगबली का गदा.. किस पर होगा प्रहार? हनुमान जंयती पर छत्तीसगढ़ के नेताओं का व्यंगबाण, आखिर किस पार्टी में हैं कालनेमि जैसे नेता?
Modified Date: April 2, 2026 / 11:06 pm IST
Published Date: April 2, 2026 11:06 pm IST

रायपुरः Politics in Chhattisgarh on Hanuman Jayanti हनुमान जयंती पर चहुंहोर बजरंग बली के भक्त उनके जन्मोत्सव पर तरह-तरह के अनुष्ठान में जुटे हैं तो सियासी अखाड़े में पक्ष और विपक्ष के बीच सच्चे रामभक्त और कालनेमि कौन पर बहस छिड़ी है। प्रदेश के कद्दावर मंत्री ने जुबानी वार कर कांग्रेस पर हनुमान की गदा का प्रहार होगी कहकर कटाक्ष किया तो कांग्रेस के सीनियर नेता ने बीजेपी के भीतर कालनेमि नेताओं की मौजूदगी का व्यंग बाण चलाया। सवाल उठा कि आज के दिन आशीर्वाद छोड़े प्रभु राम के भक्त हनुमान जी गदा को क्यों याद किया जा रहा है?

Politics in Chhattisgarh on Hanuman Jayanti हनुमान जयंती पर बजरंग बलि के सभी भक्त अपने आराध्य हनुमान की भक्ति में लीन हैं तो दूसरी तरफ नेता एक-दूसरे पर व्यंगबाण चलाकर शक्ति दिखा रहे हैं। नक्सलवाद समेत विभिन्न मुद्दों पर विपक्ष के वार का जवाब देते हुए, प्रदेश के कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कटाक्ष कर कहा कि, कांग्रेस पर हनुमान जी की गदा पड़ चुकी है, जिस दिन कांग्रेस ने राम जी का आतिथ्य स्वीकार नहीं किया था, उसी दिन उसका रसातल में जाना लिख दिया गया। नेताम इतने पर ही नहीं रुके कांग्रेसियों का भविष्य बताते हुए कहा कि, धीरे-धीरे कांग्रेस समाप्त हो जाएगी या कांग्रेसी समर्पण कर बीजेपी में शामिल हो जाएंगे।

मंत्री नेताम के बयान पर पूर्व PCC चीफ धनेंद्र साहू ने पलटवार उल्टे मंत्री जी को अपनी पार्टी के भीतर झांकने की नसीहत दी। साहू ने कहा कि हनुमान जी की गदा उन्हीं की पार्टी पर चलेगी, क्योंकि कालनेमि जैसे नेता उन्हीं के पाले में हैं, जो भगवान राम के नाम पर राजनीति चमकाते हैं। कांग्रेसी तो हमेशा राम-कृष्ण की भक्ति करती रही है। बहस पुरानी है लेकिन हनुमान जन्म के दिन भी जारी रही इस बात को लेकर भक्त हैरत में हैं। सवाल ये है कि क्या आज के दिन भी ये बहस जरूरी है? सवाल ये भी है हमेशा धर्म की रक्षा में उठी हनुमान की गदा का प्रहार आखिर किस पक्ष पर होगा?

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