सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों ने संसद मार्च हिंसा पर ‘संतुलित’ विमर्श की मांग की

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सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों ने संसद मार्च हिंसा पर 'संतुलित' विमर्श की मांग की

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  • Publish Date - July 31, 2026 / 03:20 PM IST,
    Updated On - July 31, 2026 / 03:20 PM IST

नयी दिल्ली, 31 जुलाई (भाषा) सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों के एक समूह ने 20 जुलाई के ‘संसद मार्च” के दौरान दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का बचाव करते हुए शुक्रवार को कहा कि हिंसा को लेकर जारी चर्चा ‘एकतरफा’ हो गई है और इसमें घायल हुए पुलिसकर्मियों पर ध्यान नहीं दिया गया है।

दिल्ली पुलिस सेवानिवृत्त अराजपत्रित अधिकारी संघ ने प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में एक पत्रकार वार्ता में कार्यरत कर्मियों और उनके परिवारों के साथ एकजुटता व्यक्त की।

संगठन ने जोर देकर कहा कि कानून-व्यवस्था की कठिन स्थिति में काम करने के बावजूद बल को अनुचित तरीके से पेश किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और राज्यसभा सदस्य बृजलाल ने कहा कि पुलिस की आलोचना ने हिंसा के दौरान 128 पुलिस कर्मियों को लगी चोटों को दबा दिया है।

उन्होंने कहा, ‘लगभग 38 वर्षों की सेवा में, मैंने कई कानून-व्यवस्था की स्थितियों को संभाला है। हर कोई सवाल कर रहा है कि पुलिस ने क्या किया, लेकिन कोई यह नहीं पूछ रहा कि 128 पुलिस कर्मियों पर हमला किसने किया। चर्चाओं में शायद ही कभी पुलिस प्रशिक्षण, मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) या उस क्रम का उल्लेख होता है जिसमें बल प्रयोग किया जाता है।’

बृजलाल ने कहा कि हिंसक भीड़ से निपटते समय पुलिसकर्मियों को चरणबद्ध प्रतिक्रिया का पालन करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है।

उन्होंने भीड़-नियंत्रण की स्थापित प्रक्रियाओं के संदर्भ में पुलिस कार्रवाई को देखे जाने का तर्क देते हुए कहा, ‘एक क्रम होता है। हम पहले पानी की बौछारों का उपयोग करते हैं, फिर आंसू गैस, और उसके बाद ही लाठीचार्ज करते हैं। लाठीचार्ज के दौरान भी, कर्मियों को शरीर के महत्वपूर्ण हिस्सों पर प्रहार न करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। गैर-घातक हथियार बाद में आते हैं।’

बृज लाल ने पैलेट गन के इस्तेमाल का भी बचाव किया और कहा कि इनके बारे में ‘बहुत ज़्यादा हंगामा’ खड़ा किया गया है, जबकि ये जानलेवा नहीं हैं और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल की जाती हैं ताकि हताहतों की संख्या कम रहे।

उन्होंने कहा, ‘पैलेट गन 12-बोर की शॉटगन है। इसे इसलिए पेश किया गया था ताकि पुलिस को राइफलों का इस्तेमाल न करना पड़े। इसे बेवजह खलनायक बना दिया गया है।’

उन्होंने यह भी कहा कि उच्चतम न्यायालय ने ऐसे गैर-घातक हथियारों की वैधता को बरकरार रखा है।

सेवानिवृत्त कर्मियों ने युवा पीढ़ी से पुलिसकर्मियों द्वारा दिए गए बलिदानों को स्वीकार करने की भी अपील की।

सेवानिवृत्त सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) राजेंद्र पठानिया ने कहा कि पुलिसकर्मी ‘कमज़ोर नहीं हैं’, लेकिन वे जनता से अधिक समझ और सहयोग के हकदार हैं।

उन्होंने कहा, ‘मैं युवा पीढ़ी से भी अनुरोध करता हूं कि वे कानून-व्यवस्था बनाए रखने और देश की एकता की रक्षा करने में पुलिस द्वारा निभाई जाने वाली भूमिका को स्वीकारें।’

पूर्व अधिकारियों ने कहा कि उन्हें छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि हिंसक प्रदर्शनों के दौरान पुलिसकर्मियों से यह उम्मीद कैसे की जा सकती है कि वे वास्तविक छात्रों और ‘अपराधिक तत्वों’ के बीच अंतर करें।

उन्होंने यह भी कहा कि आलोचनाओं का सामना करने के बावजूद, सेवा आचरण नियमों के कारण सेवारत पुलिसकर्मी सार्वजनिक रूप से विरोध प्रदर्शन नहीं कर सकते या अपना बचाव नहीं कर सकते।

भाषा नोमान नोमान वैभव

वैभव