पूर्व प्रभाव से पर्यावरण मंजूरी: नये सिरे से सुनवाई के लिए पीठ गठित करने का न्यायालय से आग्रह

पूर्व प्रभाव से पर्यावरण मंजूरी: नये सिरे से सुनवाई के लिए पीठ गठित करने का न्यायालय से आग्रह

पूर्व प्रभाव से पर्यावरण मंजूरी: नये सिरे से सुनवाई के लिए पीठ गठित करने का न्यायालय से आग्रह
Modified Date: February 5, 2026 / 04:24 pm IST
Published Date: February 5, 2026 4:24 pm IST

नयी दिल्ली, पांच फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय से बृहस्पतिवार को एक वकील ने आग्रह किया कि वह पर्यावरण मानदंडों का उल्लंघन करने वाली परियोजनाओं को पूर्व प्रभाव से पर्यावरण मंजूरी देने से संबंधित याचिकाओं पर नये सिरे से सुनवाई के लिए एक पीठ का गठन करे।

तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश बी आर गवई की अध्यक्षता वाली तीन-सदस्यीय पीठ ने अपने 2:1 के बहुमत वाले फैसले में 18 नवंबर 2025 को केंद्र और अन्य प्राधिकारों द्वारा पर्यावरण मानदंडों का उल्लंघन करने वाली परियोजनाओं को भारी जुर्माने के भुगतान पर पूर्व प्रभाव से पर्यावरण मंजूरी देने का मार्ग प्रशस्त किया था।

इससे पहले, 16 मई 2025 को न्यायमूर्ति ए एस ओका (अब सेवानिवृत्त) और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और संबंधित प्राधिकारों को उन परियोजनाओं को पूर्व प्रभाव से पर्यावरण मंजूरी प्रदान करने से रोक दिया था जो पर्यावरण मानदंडों का उल्लंघन करती पाई गई थीं।

इस फैसले को पलटते हुए, न्यायमूर्ति गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मुद्दे पर गैर-सरकारी संगठन ‘वंशशक्ति’ द्वारा दायर याचिका सहित सभी याचिकाओं पर नये सिरे से सुनवाई का आदेश दिया था।

बृहस्पतिवार को, प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ को एक वकील ने आग्रह किया कि याचिकाओं पर नये सिरे से सुनवाई के लिए तीन-सदस्यीय एक पीठ गठित की जाए।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘देखते हैं।’’

तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन ने 18 नवंबर के बहुमत के अपने फैसले में 16 मई 2025 के पूर्ववर्ती फैसले को पलट दिया था।

सोलह मई 2025 को न्यायमूर्ति ओका (अब सेवानिवृत्त) द्वारा लिखे गए फैसले का हिस्सा रहे न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां ने असहमति जताते हुए अपना फैसला लिखा था और कहा था कि पर्यावरण मंजूरी पूर्व प्रभाव से देना पर्यावरण कानून के लिए उचित नहीं है, क्योंकि यह एहतियाती सिद्धांत के साथ-साथ सतत विकास की आवश्यकता के विपरीत है।

न्यायमूर्ति गवई ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया था कि वह मामले को प्रधान न्यायाधीश के समक्ष रखे ताकि केंद्र की अधिसूचना और कार्यालय ज्ञापन के खिलाफ दायर याचिकाओं पर नये सिरे से सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक आदेश जारी किए जा सकें।

भाषा सुभाष सुरेश

सुरेश


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