कानून के शासन का उद्देश्य हर नागरिक को समयबद्ध और सुलभ न्याय उपलब्ध कराना है: प्रधान न्यायाधीश
कानून के शासन का उद्देश्य हर नागरिक को समयबद्ध और सुलभ न्याय उपलब्ध कराना है: प्रधान न्यायाधीश
जयपुर, एक अगस्त (भाषा) भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने शनिवार को न्याय व्यवस्था में मध्यस्थता को एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए कहा कि कानून के शासन (रूल ऑफ लॉ) का उद्देश्य हर विवाद का न्यायिक फैसला कराना नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक को उसकी गरिमा का सम्मान करते हुए समयबद्ध और सुलभ न्याय उपलब्ध कराना है।
‘कॉमनवेल्थ पीस मीडिएशन एंड रूल्स ऑफ लॉ सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि न्याय प्रणाली का लक्ष्य ऐसे समाधान सुनिश्चित करना होना चाहिए जो प्रभावी, मानवीय और सभी के लिए सुलभ हों।
उन्होंने कहा, ‘‘कानून का शासन यह नहीं कहता कि हर शिकायत का अदालत में फैसला हो, बल्कि यह सुनिश्चित करता है कि हर नागरिक को गरिमा के साथ समय पर सुलभ न्याय पाने का अवसर मिले।’’
मध्यस्थता की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि यह प्रक्रिया विवाद में शामिल पक्षों को अपने समाधान स्वयं तय करने की स्वतंत्रता देती है।
उन्होंने कहा, ‘‘केवल मध्यस्थता ही ऐसी व्यवस्था है जिसमें पक्षकार स्वयं अपने विवाद का समाधान तैयार करते हैं। इससे विवाद के वास्तविक कारणों का समाधान अपेक्षाकृत कम समय और कम लागत में संभव हो पाता है।’’
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि मध्यस्थता के माध्यम से पक्षकार कठोर कानूनी दलीलों से आगे बढ़कर अधिक सार्थक और व्यावहारिक समाधान तक पहुंच सकते हैं, विशेषकर उन मामलों में जहां आपसी संबंधों को बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है।
उन्होंने मध्यस्थता के व्यापक दार्शनिक और व्यावहारिक महत्व पर भी जोर देते हुए कहा कि यह आधुनिक जरूरतों के साथ-साथ विवाद समाधान की हमारी प्राचीन परंपराओं के अनुरूप है।
प्रधान न्यायाधीश ने विश्वास जताया कि बढ़ते मुकदमों और जटिल होते विवादों के बीच न्यायिक व्यवस्था के विकास के साथ मध्यस्थता की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होती जाएगी।
उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था हमारी प्राचीन विरासत जितनी पुरानी और सोमवार सुबह अदालतों में लगने वाले मामलों की सूची जितनी ही आज की आवश्यकता है।
अपने संबोधन के अंत में प्रधान न्यायाधीश ने सम्मेलन की सफलता के लिए शुभकामनाएं भी दीं।
भाषा बाकोलिया
नेत्रपाल संतोष
संतोष

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