दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में स्वामित्व अधिकार और निर्माण कार्य के नियमों को सरल बनाया गया

दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में स्वामित्व अधिकार और निर्माण कार्य के नियमों को सरल बनाया गया

दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में स्वामित्व अधिकार और निर्माण कार्य के नियमों को सरल बनाया गया
Modified Date: April 7, 2026 / 03:20 pm IST
Published Date: April 7, 2026 3:20 pm IST

नयी दिल्ली, सात अप्रैल (भाषा) केंद्र सरकार ने मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी की अनधिकृत कॉलोनियों में संपत्तियों के पंजीकरण और निर्माण गतिविधियों के लिए अनुमति प्रक्रिया को सरल बनाने हेतु संशोधित ‘जैसा है जहां है’ आधारित नियमितीकरण नीति की घोषणा की।

संशोधित नीति के तहत दिल्ली की कुल 1,731 अनधिकृत कॉलोनियों में से 1,511 कॉलोनियों में पहले से निर्मित भवनों के पंजीकरण के लिए एक ‘लेआउट प्लान’ की आवश्यकता समाप्त कर दी गई है। इसके अलावा, अब दिल्ली सरकार का राजस्व विभाग स्वामित्व विलेख जारी करेगा, ना कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए)।

केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर की मौजूदगी में आयोजित एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस नीति की घोषणा को शहरवासियों के लिए एक बड़ा दिन बताया।

उन्होंने कहा कि संशोधित नीति के तहत संपत्तियों के स्वामित्व के लिए आवेदन 24 अप्रैल से पीएम-उदय पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन जमा किए जा सकते हैं और इस कदम से ऐसी कॉलोनियों के लगभग 50 लाख निवासियों को लाभ होगा।

केंद्र सरकार ने ‘स्वामित्व अधिकार और भवन नियमितीकरण दोनों प्रक्रियाओं को सरल बनाकर ‘जैसा है जहां है’ के आधार पर अनधिकृत कॉलोनियों के नियमितीकरण’ के अलावा, राष्ट्रीय राजधानी के लिए पारगमन उन्मुख विकास (टीओडी) नीति भी शुरू की है।

रेखा गुप्ता ने कहा कि अनधिकृत कॉलोनियों में स्वामित्व अधिकारों के नियमितीकरण के लिए पीएम-उदय (प्रधानमंत्री – दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियां आवास अधिकार योजना) योजना 2019 में शुरू की गई थी, लेकिन इसमें कई तकनीकी दिक्कतें आईं, जिसके कारण एक संशोधित नीति की आवश्यकता पड़ी।

उन्होंने कहा कि 2019 की नीति के तहत लगभग 40,000 संपत्ति विलेख जारी किए गए थे और अब सरलीकृत अनुमोदन प्रक्रिया और 45 दिनों के भीतर विलेख जारी करने की समय सीमा निर्धारित होने से प्रक्रिया में तेजी आएगी।

खट्टर ने कहा कि ‘जैसा है, जहां है’ के आधार पर बनाई गई नियमितीकरण नीति अनधिकृत कॉलोनियों में स्थित पुरानी इमारतों पर लागू होगी, जबकि नये निर्माणों के लिए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) द्वारा निर्धारित मानदंडों का पालन करना और उसकी अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में कई एजेंसियों के होने के कारण उनके बीच समन्वय महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अब, ऐसी कॉलोनियों के निवासी स्वामित्व अधिकार प्राप्त कर सकेंगे और निर्माण कार्य कर सकेंगे।

खट्टर ने कहा कि पारगमन उन्मुख विकास दिल्ली के मास्टरप्लान 2021 का हिस्सा था, लेकिन इसमें कई बाधाएं आईं। उन्होंने कहा कि संशोधित नीति से यातायात जाम की समस्या के साथ-साथ शहर की आवास संबंधी जरूरतों को पूरा करने में भी मदद मिलेगी।

भाषा अमित अविनाश

अविनाश


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