शिअद प्रमुख बादल ने ओटीटी मंच से ‘सतलुज’ को हटाए जाने की निंदा की

शिअद प्रमुख बादल ने ओटीटी मंच से ‘सतलुज’ को हटाए जाने की निंदा की

शिअद प्रमुख बादल ने ओटीटी मंच से ‘सतलुज’ को हटाए जाने की निंदा की
Modified Date: July 6, 2026 / 12:43 pm IST
Published Date: July 6, 2026 12:43 pm IST

चंडीगढ़, छह जुलाई (भाषा) शिरोमणि अकाली दल (शिअद)प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने ओटीटी मंच से दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म ‘सतलुज’ को हटाए जाने की निंदा करते हुए सोमवार को कहा कि पंजाब अपने अतीत का सामना ईमानदारी से करने का हकदार है, न कि उसे दबाने का।

मूल रूप से ‘‘पंजाब 95’’ शीर्षक वाली यह फिल्म पिछले शुक्रवार को भारत में ‘जी5’ पर रिलीज हुई थी। हालांकि, महज दो दिन बाद ही इसे मंच से हटा दिया गया।

बादल ने कहा कि वह भारत में ‘जी5’ से सतलुज को मनमाने ढंग से हटाए जाने से हैरान हैं।

उन्होंने कहा कि यह केवल ‘‘दमन’’ नहीं है, बल्कि यह हमारी सामूहिक स्मृति, सच्चाई और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर एक हमला है।

बादल ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मैं इस कदम की कड़ी निंदा करता हूं। पंजाब अपने अतीत का सामना ईमानदारी से करने का हकदार है, न कि उसे दबाने का।’’

बादल ने कहा, ‘‘यह पंजाब के दर्दनाक इतिहास को उजागर करती एक दमदार फिल्म है और सरदार जसवंत सिंह जी खालड़ा के सर्वोच्च बलिदान का सम्मान करती है, उसे इस तरह खामोश नहीं किया जा सकता।’’

मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित यह फिल्म केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के चलते तीन साल से अधिक समय तक रिलीज नहीं की जा सकी थी।

हनी त्रेहान द्वारा निर्देशित यह फिल्म बिना किसी काट-छांट के रिलीज की गई थी, लेकिन रविवार शाम को इस मंच ने दर्शकों को सूचित करते हुए बयान दिया कि यह फिल्म अब भारत में उपलब्ध नहीं है।

इस फिल्म में दिलजीत ने खालड़ा की भूमिका निभाई है, जिन्होंने 1984 से 1994 तक के 10 साल की अवधि के दौरान पंजाब में हजारों अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार की पड़ताल की थी, जिसके बाद वह खुद 1995 में लापता हो गए थे।

साल 2005 में पंजाब पुलिस के चार कर्मचारियों को उनके अपहरण और हत्या का दोषी ठहराते हुए सात साल जेल की सजा सुनाई गई थी।

भाषा खारी संतोष

संतोष


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