कर्नाटक के स्कूलों में भगवा गमछों की अनुमति नहीं: मुख्यमंत्री सिद्धरमैया

Ads

कर्नाटक के स्कूलों में भगवा गमछों की अनुमति नहीं: मुख्यमंत्री सिद्धरमैया

  •  
  • Publish Date - May 14, 2026 / 04:09 PM IST,
    Updated On - May 14, 2026 / 04:09 PM IST

मैसूरु (कर्नाटक), 14 मई (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने बृहस्पतिवार को स्पष्ट किया कि धार्मिक प्रतीकों पर राज्य सरकार के आदेश के तहत शैक्षणिक संस्थानों में भगवा गमछों की अनुमति नहीं दी जाएगी, जबकि हिजाब, पगड़ी, रुद्राक्ष और जनेऊ जैसी पहले से प्रचलित प्रथाएं जारी रहेंगी।

मुख्यमंत्री ने मैसूरु में संवाददाताओं से बातचीत में स्पष्ट किया कि जो धार्मिक पोशाक पहले से चलन में हैं, केवल उन्हीं की अनुमति दी जाएगी।

कर्नाटक सरकार ने बुधवार को एक आदेश पारित कर विद्यालयों में छात्रों को हिजाब, जनेऊ, शिवधारा और रुद्राक्ष पहनने की अनुमति दी थी। इस आदेश ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार के 2022 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें ‘हिजाब बनाम भगवा गमछा’ विवाद के बाद सरकारी विद्यालयों में हिजाब पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

विपक्ष ने इस कदम की आलोचना करते हुए इसे ‘‘तुष्टीकरण की राजनीति’’ करार दिया है।

हिंदू दक्षिणपंथी संगठनों के एक वर्ग ने विद्यालयों में भगवा गमछा पहनने की चेतावनी दी थी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इसकी अनुमति नहीं होगी।

सिद्धरमैया ने पत्रकारों से कहा, ‘‘भगवा गमछों की अनुमति नहीं है। वे गमछे नहीं पहने जा सकते। पगड़ी, जनेऊ, शिवधारा, रुद्राक्ष और हिजाब पहने जा सकते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘देखिए, यह सिर्फ हिजाब की बात नहीं है। लोग जनेऊ, शिवधारा, रुद्राक्ष की माला भी पहन सकते हैं। हर कोई अपनी आस्था के अनुसार चीजें पहन सकता है। यह कक्षा 12 तक लागू है, चाहे वह हाई स्कूल हो, कॉलेज हो या प्राइमरी स्कूल।’’

यह पूछे जाने पर कि क्या भगवा पगड़ी की अनुमति दी जाएगी, मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल वही प्रथाएं मान्य होंगी जो पहले से अस्तित्व में हैं और कोई भी नयी प्रथा शुरू नहीं की जा सकती।

उन्होंने कहा, ‘‘जब हम पगड़ी कहते हैं, तो हमारा मतलब उन प्रथाओं से है जो पहले से मौजूद हैं। कुछ भी नया पेश नहीं किया जा सकता।’’

डीजल बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अपने काफिले को कम किए जाने के सवाल पर सिद्धरमैया ने कहा कि ऐसे उपायों का असर केवल अस्थायी होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने जो कहा है वह सही कदम नहीं है। इसके बजाय अन्य देशों के साथ बात करना और उनमें जागरूकता लाना बेहतर होगा।’’

चिकित्सा संस्थानों में दाखिले के लिए अनिवार्य राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) परीक्षा से जुड़े विवाद पर सिद्धरमैया ने परीक्षा के आयोजन की आलोचना की और कहा कि व्यवस्था की खामियों के कारण छात्रों को नुकसान नहीं होना चाहिए।

उन्होंने सवाल किया, ‘‘हमने अभियांत्रिकी और अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अनिवार्य सामान्य प्रवेश परीक्षा (सीईटी) आयोजित की थी, लेकिन वे नीट ले आए। अगर वे इसे ठीक से आयोजित करने में विफल रहते हैं, तो उन छात्रों का क्या होगा जिन्होंने कड़ी मेहनत की? उनके भविष्य का क्या होगा?’

भाषा सुमित नेत्रपाल

नेत्रपाल