कन्नूर में ओणम के फूलों की बिक्री से छात्रा के गुर्दा प्रतिरोपण के लिए जुटाई जा रही धनराशि

कन्नूर में ओणम के फूलों की बिक्री से छात्रा के गुर्दा प्रतिरोपण के लिए जुटाई जा रही धनराशि

कन्नूर में ओणम के फूलों की बिक्री से छात्रा के गुर्दा प्रतिरोपण के लिए जुटाई जा रही धनराशि
Modified Date: August 24, 2026 / 11:43 am IST
Published Date: August 24, 2026 11:43 am IST

कन्नूर (केरलम), 24 अगस्त (भाषा) केरलम के कन्नूर में चाला के युवाओं और स्थानीय लोगों ने ओणम के दौरान फूलों की बिक्री को 11वीं कक्षा की एक छात्रा के गुर्दा प्रतिरोपण के लिए धन जुटाने के अभियान में बदल दिया है।

चाला उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में 11वीं कक्षा की छात्रा श्रीदेवीना गुर्दे की गंभीर बीमारी से पीड़ित है और उसे सप्ताह में तीन बार डायलिसिस कराना पड़ता है।

उसके इलाज से परिवार पर भारी आर्थिक बोझ पड़ा है तथा गुर्दा प्रतिरोपण एवं उसके बाद की देखभाल के लिए करीब 30 लाख रुपये की जरूरत है।

स्थानीय युवाओं के एक समूह ‘चाला चांग्स’ ने धन जुटाने के लिए स्थानीय लोगों और व्यापारियों के साथ मिलकर अभियान शुरू किया है। ओणम के दौरान फूलों की बिक्री इस अभियान का एक प्रमुख हिस्सा है।

चाला में अलग-अलग स्थानों पर लगाई गई दुकानों पर बिक्री के लिए कर्नाटक और अन्य स्थानों से करीब ढाई लाख रुपये के फूल मंगाए गए हैं।

समूह के सदस्य बशीर ने पत्रकारों से कहा, ‘‘हम पहले नियमित कारोबार करते थे लेकिन इस बार हमने इस बच्ची की खातिर मुनाफे के बारे में नहीं सोचा है।’’

उन्होंने कहा कि केवल मुनाफा नहीं बल्कि फूलों की बिक्री से मिलने वाली पूरी राशि श्रीदेवीना के इलाज पर खर्च की जाएगी।

गुर्दा प्रतिरोपण के लिए धन जुटाने के मकसद से एक स्थानीय समिति गठित किए जाने के बाद यह पहल शुरू की गई। स्थानीय लोगों ने बताया कि कुछ लोग गुर्दा दान करने की इच्छा भी जता चुके हैं।

एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा, ‘‘यहां जाति, धर्म या राजनीति की कोई बात नहीं है। सभी लोग इस बच्ची की जान बचाने के एक ही उद्देश्य से साथ आए हैं।’’

समूह के सदस्यों के अनुसार, चाला और कन्नूर के अन्य हिस्सों में फूलों की और दुकानें लगाई जा रही हैं तथा युवा एवं स्थानीय लोग बारी-बारी से इन्हें संभाल रहे हैं।

समूह के एक सदस्य ने कहा, ‘‘हम छात्रा के इलाज के लिए धन जुटाने के मकसद से पायसम (खीर) भी बेच रहे हैं। पूरी कोशिश की जा रही है कि उसे उचित इलाज मिले और वह अगले साल हमारे साथ खुशी-खुशी ओणम मना सके।’’

स्थानीय लोगों ने चाला से होकर गुजरने वाले लोगों और अन्य लोगों से फूल खरीदकर तथा इलाज के लिए बनाए गए कोष में योगदान देकर इस अभियान का समर्थन करने की अपील की है।

भाषा

सिम्मी वैभव

वैभव


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