Sawan Somwar Last Monday: सावन के आखिरी सोमवार पर क्षीरेश्वर नाथ मंदिर में उमड़ा भक्तों का हुजूम, बड़ी संख्या में दूर-दराज से पहुंचे शिव भक्त

Sawan Somvar Last Monday: क्षीरेश्वर नाथ महादेव मंदिर की स्थापना महाराजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए पुत्रेष्टि यज्ञ से पहले की थी।

Sawan Somwar Last Monday: सावन के आखिरी सोमवार पर क्षीरेश्वर नाथ मंदिर में उमड़ा भक्तों का हुजूम, बड़ी संख्या में दूर-दराज से पहुंचे शिव भक्त

Sawan Somvar Last Monday/Image Credit: IBC24.in


Reported By: Apurva Pathak,
Modified Date: August 24, 2026 / 09:48 am IST
Published Date: August 24, 2026 9:45 am IST
HIGHLIGHTS
  • रामनगरी में कई ऐसे प्राचीन मंदिर है जिसका वर्णन धार्मिक ग्रंथों में भी किया गया है।
  • ऐसा ही एक ऐतिहासिक मंदिर है क्षीरेश्वरनाथ, जिसकी स्थापना त्रेतायुग में की गई थी।
  • महाराजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए पुत्रेष्टि यज्ञ से पहले क्षीरेश्वरनाथ मंदिर की स्थापना की थी।

Sawan Somvar Last Monday: अयोध्या: रामनगरी में कई ऐसे प्राचीन मंदिर है जिसका वर्णन धार्मिक ग्रंथों में भी किया गया है। ऐसा ही एक ऐतिहासिक मंदिर है क्षीरेश्वरनाथ, जिसकी स्थापना त्रेतायुग में की गई थी। जहां महाराजा दशरथ अपनी रानियां के संग पूजन करते थे। भगवान श्रीराम ने भी इस स्थान पर भगवान भोलेनाथ की आराधना की थी।

महाराज दशरथ ने की थी स्थापना

राम मंदिर से 500 मीटर की दूरी पर स्थित क्षीरेश्वर नाथ महादेव का मंदिर जिसकी स्थापना महाराजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए पुत्रेष्टि यज्ञ से पहले की थी। पुत्रेष्टि यज्ञ के बाद महाराज दशरथ को चार पुत्र हुए थे। यही कारण है कि सावन माह में इस स्थान पर दर्शन करने वाली भक्तों की लंबी कतार लगती है। (Sawan Somvar Last Monday) विशेष तिथियों पर धार्मिक अनुष्ठान, झांकी और विशेष आरती भंडारे का भी आयोजन किया जाता है जिसमें शामिल होने के लिए अयोध्यावासी ही नहीं दूर दराज से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं।

मंदिर के पुजारी ने बताई क्यों है लोगों में इतनी आस्था

Sawan Somvar Last Monday: मंदिर के पुजारी प्रेम नारायण मिश्र ने बताया कि यह मंदिर बेहद प्राचीन है। हालांकि समय के साथ व निर्माण कार्यों के कारण इसका बाहरी स्वरूप परिवर्तित होता रहा है। क्षीरेश्वर नाथ महादेव की शिवलिंग के बारे में कहा जाता है कि चक्रवर्ती सम्राट महाराजा दशरथ के द्वारा इस शिवलिंग की स्थापना की गई थी। पुजारी ने आगे बताया कि मान्यता है कि, महाराजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए इस मंदिर की स्थापना की थी और उन्होंने क्षीरेश्वर नाथ महादेव का अभिषेक दूध से किया था जिसके बाद महाराजा दशरथ के चार पुत्र हुए थे। इसके बाद से लोग संतान प्राप्ति के लिए क्षीरेश्वर नाथ महादेव का दूध से अभिषेक करते हैं।

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