सनातन धर्म को कभी मिटाया नहीं जा सकता: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन

सनातन धर्म को कभी मिटाया नहीं जा सकता: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन

सनातन धर्म को कभी मिटाया नहीं जा सकता: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन
Modified Date: March 5, 2026 / 05:04 pm IST
Published Date: March 5, 2026 5:04 pm IST

बेलगावी (कर्नाटक), पांच मार्च (भाषा) उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने बृहस्पतिवार को यहां कहा कि सनातन धर्म को समय के साथ परखा जा सकता है, लेकिन इसे कभी मिटाया नहीं जा सकता।

एक प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, उन्होंने यह बात जिले के यादुरू में श्री वीरभद्रेश्वर मंदिर में राजगोपुरम के उद्घाटन में मुख्य अतिथि के तौर पर हिस्सा लेते हुए कही।

इस मौके को आध्यात्मिक पुनरुत्थान और सभ्यता की फिर से पुष्टि का पल बताते हुए उपराष्ट्रपति ने एकत्रित लोगों से कहा कि भारत सिर्फ एक देश नहीं बल्कि एक जीती-जागती सभ्यता है जिसमें सिंधु घाटी से कन्याकुमारी तक चेतना का सतत प्रवाह होता है।

उन्होंने कहा कि यह वह पवित्र भूमि है जहां वेदों का शाश्वत ज्ञान पहली बार सुना गया था और जहां भगवद गीता का गहरा संदेश मानवता को हिम्मत से काम करने, नेकी के साथ जीने और विश्वास के साथ समर्पण करने के लिए मार्गदर्शन देता रहता है।

राधाकृष्णन ने कहा कि हिंदू चेतना सिर्फ रीति-रिवाजों तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवनशैली है। उन्होंने “वसुधैव कुटुम्बकम” की शाश्वत सोच और भारत के आध्यात्मिक नजरिए पर ज़ोर दिया, जो प्रकृति और हर इंसान में दिव्यता देखता है।

वीर-शैव लिंगायत परंपरा का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कर्नाटक और पड़ोसी महाराष्ट्र में आध्यात्मिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक और सामाजिक सुधार में इसके अहम योगदान का वर्णन किया।

उन्होंने कहा कि वीर-शैव मठों और मंदिरों ने आस्था, सेवा और सामाजिक सद्भाव के मूल्यों को बढ़ावा देने में एक बदलाव लाने वाली भूमिका निभाई है।

विज्ञप्ति के मुताबिक, राधाकृष्णन ने कर्नाटक के जाने-माने लिंगायत धर्मगुरु और समाज सुधारक शिव योगी श्री कदासिद्धेश्वर स्वामीजी को श्रद्धांजलि दी।

उन्होंने कहा, “सनातन धर्म को समय के साथ परखा जा सकता है लेकिन इसे कभी मिटाया नहीं जा सकता।”

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘विकास भी, विरासत भी’ दृष्टिकोण का जिक्र करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि भारत का विकास और विरासत साथ-साथ चलने चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत आज प्रौद्योगिकी में आगे, आर्थिक रूप से मजबूत और दुनिया भर में असरदार देश के तौर पर तरक्की कर रहा है और साथ ही अपनी सभ्यता की जड़ों से भी जुड़ा हुआ है।

राजगोपुरम के उद्घाटन को आस्था और परंपरा की निरंतरता बताते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि पवित्र जगहों को फिर से जीवंत करना सिर्फ स्थापत्य कला के बारे में नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक आत्मविश्वास और आध्यात्मिक जागरूकता को फिर से जगाने के बारे में है।

भाषा वैभव नरेश

नरेश


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