न्यायालय ने संभल मस्जिद सर्वेक्षण के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई स्थगित की

न्यायालय ने संभल मस्जिद सर्वेक्षण के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई स्थगित की

न्यायालय ने संभल मस्जिद सर्वेक्षण के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई स्थगित की
Modified Date: August 11, 2026 / 01:08 pm IST
Published Date: August 11, 2026 1:08 pm IST

नयी दिल्ली, 11 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शाही जामा मस्जिद-हरिहर मंदिर विवाद में सर्वेक्षण के आदेश के खिलाफ इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली संभल की जामा मस्जिद प्रबंधन समिति की याचिकाओं पर सुनवाई मंगलवार को 18 अगस्त तक टाल दी।

न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने सुनवाई टालने के अनुरोध वाला एक पत्र मिलने के बाद मामले को स्थगित कर दिया।

संभल में जामा मस्जिद की प्रबंधन समिति की ओर से मंगलवार को दायर दो अलग-अलग याचिकाएं पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आईं। इन याचिकाओं में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 19 मई, 2025 के आदेश को चुनौती दी गई है।

शीर्ष अदालत को पहले बताया गया था कि दिसंबर 2024 के उसके आदेश को देखते हुए संभल की अदालत के आदेश पर हुए सर्वेक्षण से जुड़े मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय को आगे की कार्यवाही नहीं कर सकता था।

शीर्ष अदालत ने 12 दिसंबर, 2024 को दिए एक महत्वपूर्ण आदेश में अगले निर्देश तक देश की अदालतों को धार्मिक स्थलों, खासकर मस्जिदों और दरगाहों (मुस्लिम धार्मिक स्थल), को वापस हासिल करने के अनुरोध वाली नयी याचिकाओं पर सुनवाई करने और लंबित मामलों में कोई प्रभावी अंतरिम या अंतिम आदेश पारित करने से रोक दिया था।

शीर्ष अदालत ने 2024 का आदेश ‘पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991’ के अलग-अलग प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया था।

वर्ष 1991 का कानून किसी भी पूजा स्थल के स्वरूप में बदलाव पर रोक लगाता है और यह प्रावधान करता है कि किसी भी पूजा स्थल की धार्मिक स्थिति वैसी ही बनी रहे जैसा वह 15 अगस्त, 1947 को थी।

हालांकि, अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद से जुड़ा विवाद इसके दायरे से बाहर रखा गया था।

उच्च न्यायालय ने इस विवाद में संभल की अदालत द्वारा सर्वेक्षण के आदेश के खिलाफ मस्जिद समिति की याचिका खारिज कर दी और सर्वेक्षण के लिए दीवानी अदालत के निर्देश को सही ठहराया।

उच्च न्यायालय ने कहा था कि अदालत आयुक्त नियुक्त करने का आदेश और मुकदमा, दोनों सुनवाई योग्य हैं।

भाषा सुरभि माधव

माधव


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