न्यायालय ने केंद्र से ऋण वसूली अपीलीय न्यायाधिकरणों में रिक्तियों का ब्योरा देने को कहा

न्यायालय ने केंद्र से ऋण वसूली अपीलीय न्यायाधिकरणों में रिक्तियों का ब्योरा देने को कहा

न्यायालय ने केंद्र से ऋण वसूली अपीलीय न्यायाधिकरणों में रिक्तियों का ब्योरा देने को कहा
Modified Date: September 21, 2026 / 06:26 pm IST
Published Date: September 21, 2026 6:26 pm IST

नयी दिल्ली, 21 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को केंद्र से देश के न्यायाधिकरणों, खासकर ऋण वसूली अपीलीय न्यायाधिकरणों (डीआरएटी) में खाली पदों का ब्योरा उपलब्ध कराने को कहा।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें यह मुद्दा उठाया गया था कि पीठासीन अधिकारियों और सदस्यों की सेवानिवृत्ति तथा आगामी सेवानिवृत्तियों के कारण कई न्यायाधिकरण निष्क्रिय हो सकते हैं।

याचिकाओं में यह निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया कि सेवानिवृत्त होने वाले न्यायाधिकरणों के पीठासीन अधिकारियों और सदस्यों का कार्यकाल तब तक बढ़ाया जाए, जब तक उनकी जगह पर नयी नियुक्ति न हो जाए।

पीठ ने इस दलील पर गौर किया कि कुछ डीआरएटी को कामकाज में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी को 25 सितंबर को डीआरएटी से जुड़ा ब्योरा उपलब्ध कराने को कहा।

पीठ ने कहा कि न्यायाधिकरण के सदस्यों को कार्यकाल विस्तार का अधिकार नहीं है और ‘‘सवाल न्याय तक पहुंच का है।’’

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि ऐसे न्यायाधिकरणों में कुल रिक्तियों की संख्या करीब 90 है और खोज-सह-चयन समिति (एससीएससी) 81 रिक्तियों के संबंध में नियुक्ति प्रक्रिया पर विचार कर रही है।

प्रधान न्यायाधीश ने भरोसा दिलाया कि वह प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रिया में तेजी लाने का प्रयास करेंगे।

इससे पहले, पीठ ने कहा था कि रिक्तियों के कारण न्यायाधिकरण निष्क्रिय नहीं होने चाहिए।

शीर्ष अदालत ने केंद्र से कहा था कि ऐसे अर्द्ध-न्यायिक निकायों के सेवानिवृत्त हो रहे पीठासीन अधिकारियों और सदस्यों का कार्यकाल करीब एक महीने तक बढ़ाने पर विचार किया जाए, ताकि नयी नियुक्ति होने तक कामकाज जारी रह सके।

अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा था कि नयी नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और कार्यकाल में अस्थायी विस्तार देने संबंधी ऐसी याचिकाओं पर विचार नहीं किया जाना चाहिए।

भाषा आशीष दिलीप

दिलीप


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