न्यायालय ने चिड़ियाघरों में आत्महत्या के प्रयासों को रोकने के उपाय सुनिश्चित करने की याचिका खारिज की
न्यायालय ने चिड़ियाघरों में आत्महत्या के प्रयासों को रोकने के उपाय सुनिश्चित करने की याचिका खारिज की
नयी दिल्ली, 21 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें चिड़ियाघरों में लोगों द्वारा जानवरों के बाड़ों में कूदकर आत्महत्या करने के प्रयासों को रोकने के लिए आवश्यक उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश देने की मांग की गई थी।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने यह आदेश जुलाई 2020 के दिल्ली उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
उच्च न्यायालय ने उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था, जिसमें देशभर के विभिन्न चिड़ियाघरों में लोगों के बार-बार जानवरों के बाड़ों में कूदने की घटनाओं को लेकर केंद्र और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया गया था।
हालांकि, उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता को संबंधित अधिकारियों के समक्ष ज्ञापन देने की अनुमति दी थी।
सितंबर 2020 में उच्चतम न्यायालय ने मामले की सुनवाई के लिए सहमति जताई थी और केंद्र से मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 के एक प्रावधान की वैधता को सही ठहराने को कहा था, जो आत्महत्या के प्रयास को दंडनीय अपराध बनाने वाले भारतीय दंड संहिता के प्रावधान को “लगभग निष्प्रभावी” कर देता है।
सोमवार को सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने कहा कि इसके लिए आवश्यक सुरक्षा उपाय पहले से मौजूद हैं।
याचिका खारिज करते हुए पीठ ने कहा, “हर व्यक्ति को कानून के अनुसार कार्य करना चाहिए।”
याचिका में केंद्र, केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) और अन्य संबंधित पक्षों को चिड़ियाघरों में लोगों द्वारा जानवरों के बाड़ों में कूदकर आत्महत्या करने के प्रयासों को रोकने के लिए आवश्यक उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश देने की मांग की गई थी।
सितंबर 2020 में मामले की सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि आत्महत्या का प्रयास भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 309 के तहत दंडनीय अपराध था।
उच्चतम न्यायालय ने मानसिक स्वास्थ्य संबंधी कानून और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के प्रावधानों के बीच विरोधाभास का उल्लेख किया था। उसने कहा था कि जहां पुराने कानून के तहत आत्महत्या का प्रयास दंडनीय अपराध है, वहीं बाद में बनाए गए कानून में ऐसे कृत्य की वजह गंभीर तनाव को माना गया है।
याचिका में देशभर के विभिन्न चिड़ियाघरों में लोगों के बाघ या शेर के बाड़ों में कूदने की कई घटनाओं का हवाला दिया गया था, जिनमें इन लोगों को जानवरों ने हमला कर मार डाला था।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि चिड़ियाघर के अधिकारी ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक उपाय सुनिश्चित नहीं कर रहे हैं।
भाषा तान्या दिलीप
दिलीप

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