न्यायालय ब्रह्मोस के पूर्व इंजीनियर को बरी किए जाने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई को तैयार

न्यायालय ब्रह्मोस के पूर्व इंजीनियर को बरी किए जाने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई को तैयार

न्यायालय ब्रह्मोस के पूर्व इंजीनियर को बरी किए जाने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई को तैयार
Modified Date: July 21, 2026 / 04:57 pm IST
Published Date: July 21, 2026 4:57 pm IST

नयी दिल्ली, 21 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश पुलिस की उस याचिका पर सुनवाई करने को लेकर सहमति जताई है, जिसमें ब्रह्मोस एयरोस्पेस के इंजीनियर निशांत अग्रवाल को जासूसी और शासकीय गोपनीयता अधिनियम के आरोपों से बरी करने के बंबई उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी गई है।

न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने उत्तर प्रदेश के आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) की उस याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें बंबई उच्च न्यायालय के पिछले वर्ष एक दिसंबर के उस आदेश को चुनौती दी गई है जिसके तहत अग्रवाल को प्रमुख आरोपों से बरी कर दिया गया था।

पीठ ने 13 जुलाई के अपने आदेश में कहा, ‘‘नोटिस जारी किया जाता है। मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को होगी।’’

यह मामला शुरुआत में उत्तर प्रदेश एटीएस ने दर्ज किया था और इसकी सुनवाई लखनऊ में हुई थी। बाद में इसे नागपुर स्थानांतरित कर दिया गया, क्योंकि कथित अपराध का स्थान वहीं माना गया था। अग्रवाल को इस मामले में 2023 में जमानत मिल गई थी।

हालांकि, उच्च न्यायालय ने कहा था कि अग्रवाल ने संवेदनशील सूचनाएं अवैध रूप से अपने पास रखी थीं। उच्च न्यायालय के इस आदेश के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय का रुख किया।

तीन जून, 2024 को नागपुर की एक जिला अदालत ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए जासूसी करने के मामले में अग्रवाल को शासकीय गोपनीयता अधिनियम के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अदालत ने उन पर 3,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया था।

निचली अदालत ने अग्रवाल को दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 235 के तहत दोषी ठहराते हुए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(एफ) तथा शासकीय गोपनीयता अधिनियम, 1923 की विभिन्न धाराओं के तहत दंडनीय अपराधों का दोषी पाया था।

अग्रवाल नागपुर स्थित कंपनी के मिसाइल केंद्र के तकनीकी अनुसंधान अनुभाग में कार्यरत थे। उन्हें 2018 में सैन्य खुफिया तथा उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के आतंकवाद निरोधक दस्तों ने संयुक्त अभियान में गिरफ्तार किया था।

ब्रह्मोस एयरोस्पेस के पूर्व इंजीनियर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं और शासकीय गोपनीयता अधिनियम के कड़े प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था।

अग्रवाल ने ब्रह्मोस की इकाई में चार वर्ष तक काम किया था। उन पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई को संवेदनशील तकनीकी जानकारी लीक करने का आरोप था।

भाषा आशीष नरेश

नरेश


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