न्यायालय ने भ्रष्टाचार मामले में निलंबित डीआईजी की जमानत याचिका पर सुनवाई से इनकार किया
न्यायालय ने भ्रष्टाचार मामले में निलंबित डीआईजी की जमानत याचिका पर सुनवाई से इनकार किया
नयी दिल्ली, 10 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने पंजाब पुलिस के निलंबित उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) हरचरण सिंह भुल्लर की जमानत याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करने से इनकार कर दिया।
भुल्लर को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने पिछले वर्ष अक्टूबर में भ्रष्टाचार के एक मामले में गिरफ्तार किया था।
भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने भुल्लर को यह छूट दी कि यदि दो महीने के भीतर मामले में सुनवाई शुरू नहीं होती है, तो वह जमानत के लिए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का रुख कर सकते हैं।
पीठ भुल्लर की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने इस वर्ष फरवरी में उच्च न्यायालय द्वारा जमानत से इनकार करने के आदेश को चुनौती दी थी।
भुल्लर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने जमानत की मांग करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के फरार होने का जोखिम नहीं है और मामले में आरोपपत्र तथा पूरक आरोपपत्र पहले ही दाखिल किया जा चुका है।
पीठ ने कहा कि वह इस चरण में याचिका पर विचार करने की इच्छुक नहीं है।
पिछले वर्ष अक्टूबर में एक शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि रोपड़ रेंज के डीआईजी के रूप में तैनात भुल्लर ने सरहिंद पुलिस थाने में दर्ज एक प्राथमिकी में अनुकूल कार्रवाई कराने और शिकायतकर्ता के कारोबार के खिलाफ कोई कठोर कदम न उठाने के बदले एक निजी बिचौलिए के जरिए रिश्वत की मांग की थी।
इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई और 16 अक्टूबर को चंडीगढ़ में जाल बिछाया गया, जहां एक सह-आरोपी को कथित तौर पर मांगी गई रिश्वत के हिस्से के रूप में पांच लाख रुपये लेते हुए पकड़ा गया।
इसके बाद भुल्लर को गिरफ्तार किया गया और जनवरी में चंडीगढ़ की एक विशेष सीबीआई अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी।
उच्च न्यायालय में भुल्लर के वकील ने दलील दी थी कि याचिकाकर्ता एक सम्मानित अधिकारी हैं, जिनका तीन दशकों से अधिक का बेदाग सेवा रिकॉर्ड रहा है और उनके खिलाफ मामला दुर्भावनापूर्ण आरोपों का परिणाम है।
उनके वकील ने यह भी कहा था कि याचिकाकर्ता से कोई बरामदगी नहीं हुई है और पूरा मामला एक निजी व्यक्ति से कथित बरामदगी पर आधारित है, जो सरकारी कर्मचारी नहीं है।
वहीं, सीबीआई के वकील ने उच्च न्यायालय में जमानत का विरोध करते हुए कहा था कि कथित रिश्वत की मांग के प्राथमिक साक्ष्य रिकॉर्डेड बातचीत, व्हाट्सऐप डेटा और सत्यापन के दौरान की गई कॉल से सामने आते हैं।
जमानत याचिका खारिज करते हुए उच्च न्यायालय ने भुल्लर को यह छूट दी थी कि वह मामले में महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद विशेष अदालत में जमानत के लिए दोबारा आवेदन कर सकते हैं।
भाषा गोला पवनेश
पवनेश

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