न्यायालय ने विशेष अदालतें गठित करने के लिए आतंकवाद, मादक पदार्थ के मामलों का विवरण मांगा

न्यायालय ने विशेष अदालतें गठित करने के लिए आतंकवाद, मादक पदार्थ के मामलों का विवरण मांगा

न्यायालय ने विशेष अदालतें गठित करने के लिए आतंकवाद, मादक पदार्थ के मामलों का विवरण मांगा
Modified Date: April 20, 2026 / 08:57 pm IST
Published Date: April 20, 2026 8:57 pm IST

नयी दिल्ली, 20 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने विशेष अदालतों के गठन की दिशा में कदम उठाने के लिए सोमवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आतंकवाद और नशीले पदार्थों से जुड़े उन मामलों का विवरण मांगा है, जिनकी जांच एनआईए और एनसीबी समेत केंद्रीय एवं राज्य एजेंसियां कर रही हैं।

शीर्ष अदालत ने केंद्र से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून (यूएपीए) और मादक पदार्थ पर रोकथाम से संबंधित ‘एनडीपीएस’ कानून के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई के लिए अदालतें स्थापित करने के संबंध में प्रत्येक राज्य को एक करोड़ रुपये की धनराशि उपलब्ध कराने पर विचार करने को कहा है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से विशेष अदालतों के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिवर्ष एक करोड़ रुपये जारी करने पर विचार करने को कहा।

स्वतः संज्ञान लिए गए इस मामले की अगली सुनवाई आठ मई को तय की गई।

उच्चतम न्यायालय ने 24 मार्च को राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) द्वारा जांच किए जा रहे मामलों और यूएपीए के अंतर्गत आने वाले मामलों के लिए विशेष अदालतों की स्थापना का निर्देश दिया। सोमवार को प्रधान न्यायाधीश ने इस दायरे को बढ़ाते हुए 17 राज्यों के अधिवक्ताओं से यूएपीए और एनडीपीएस कानून के तहत दर्ज मामलों का विवरण प्रस्तुत करने को कहा। इनमें ऐसे भी मामले शामिल होंगे जिनकी जांच एनआईए या राज्य पुलिस या स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) अथवा राज्य एजेंसियों द्वारा की जा रही हो।

पीठ ने इस पर जोर दिया कि शीघ्र निपटारे से आरोपियों और पीड़ितों दोनों के अधिकारों में संतुलन बना रहेगा। पीठ ने शेष राज्यों को भी नोटिस जारी कर उनसे आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने को कहा।

एनआईए के मुकदमों के वर्षों तक लंबित रहने की चिंताओं के मद्देनजर स्वतः संज्ञान लेते हुए इस याचिका पर सुनवाई शुरू की गई थी। अदालत ने गौर किया कि दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, बिहार और जम्मू-कश्मीर सहित ज्यादा लंबित मामलों वाले 17 राज्यों में से कई में विशेष अदालतें काम के अत्यधिक बोझ से दबी हुई थीं क्योंकि पीठासीन अधिकारियों को गैर-एनआईए मामले भी सौंपे गए थे।

भाषा आशीष नरेश

नरेश


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