न्यायालय ने पर्यावरण राहत कोष का इस्तेमाल नहीं होने के आरोप वाली याचिका पर जवाब मांगा
न्यायालय ने पर्यावरण राहत कोष का इस्तेमाल नहीं होने के आरोप वाली याचिका पर जवाब मांगा
नयी दिल्ली, 21 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने 1,000 करोड़ रुपये से अधिक के पर्यावरण राहत कोष का इस्तेमाल नहीं किए जाने के आरोप वाली एक जनहित याचिका पर मंगलवार को केंद्र और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) से जवाब मांगा।
जबलपुर के कार्यकर्ता ज्ञान प्रकाश ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ से गुजारिश की कि जो राहत कोष इस्तेमाल नहीं हुआ है, उसका उपयोग सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों के लिए किया जाना चाहिए था।
याचिकाकर्ता के प्रयासों की तारीफ करते हुए पीठ ने कहा कि 2019 की जनहित याचिका में पर्यावरण राहत कोष (ईआरएफ) का इस्तेमाल नहीं किए जाने का ज़िक्र है। ऐसा लगता है कि यह कोष मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 और सार्वजनिक देयता बीमा अधिनियम, 1991 के प्रावधानों के तहत लगाया और एकत्रित किया गया प्रतीत होता है।
केंद्र की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि 2020 तक कुल 881 करोड़ रुपये जमा हुए थे और बाद में यह रकम 1,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गई।
जनहित याचिका दायर करने वाले ने कहा कि ईआरएफ योजना 2008 में बनाई गई थी लेकिन इस योजना के तहत कोई रकम जारी नहीं की गई।
अदालत को सूचित किया गया कि सीपीसीबी इस कोष का प्रबंधन कर रहा है। इस पर पीठ ने केंद्र और बोर्ड के सदस्य सचिव से कोष के ‘‘इस्तेमाल/इस्तेमाल नहीं होने’’ के बारे में पूरी जानकारी देने को कहा।
पीठ ने केंद्र और सीपीसीबी से यह बताने को कहा कि क्या कोष के इस्तेमाल के लिए कोई व्यवस्था या योजना है और इसे जारी नहीं करने की क्या वजहें हैं।
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से वकील बालेंदु शेखर पेश हुए।
भाषा सुरभि नरेश
नरेश

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