सुरक्षा एजेंसियों ने जम्मू-कश्मीर में ‘म्यूल खाता’ नेटवर्क का भंडाफोड़ किया

सुरक्षा एजेंसियों ने जम्मू-कश्मीर में ‘म्यूल खाता’ नेटवर्क का भंडाफोड़ किया

सुरक्षा एजेंसियों ने जम्मू-कश्मीर में ‘म्यूल खाता’ नेटवर्क का भंडाफोड़ किया
Modified Date: February 15, 2026 / 03:39 pm IST
Published Date: February 15, 2026 3:39 pm IST

(सुमीर कौल)

नयी दिल्ली/श्रीनगर, 15 फरवरी (भाषा) सुरक्षा एजेंसियों ने जम्मू-कश्मीर में ‘म्यूल खातों’ के लगातार बढ़ते नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, और अधिकारियों को आशंका है कि इन खातों के माध्यम से भेजे गए धन का उपयोग अलगाववादी और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।

अधिकारियों ने बताया कि तीन वर्षों की अवधि में इस क्षेत्र में संचालित 8,000 से अधिक ‘म्यूल खातों’ की पहचान की गई है और इनसे लेन-देन रोक दिया गया है, जिससे धन शोधन के एक जटिल नेटवर्क का खुलासा हुआ है।

उन्होंने इन खातों को साइबर अपराध श्रृंखला में ‘‘सबसे कमजोर, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण कड़ी’’ बताया, क्योंकि इन खातों के बिना हेरफेर किए गए पैसे का क्रिप्टोकरेंसी में बदलना और इसका पता लगाना असंभव होगा।

अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य कानून लागू करने वाली एजेंसियों को बैंकों के साथ परामर्श करने के लिए कहा है, ताकि ‘म्यूल खातों’ की बढ़ती संख्या पर अंकुश लगाया जा सके और ऐसी वित्तीय धोखाधड़ी को सुविधाजनक बनाने वाले बिचौलियों की पहचान की जा सके।

अधिकारियों को संदेह है कि राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) द्वारा 2017 में जम्मू-कश्मीर में अवैध धन के प्रवाह पर की गई कार्रवाई के बाद, राष्ट्रविरोधी तत्व ‘डिजिटल हवाला’ के एक नए मॉडल की ओर रुख कर सकते हैं, जिसमें बिचौलियों द्वारा प्राप्त राशि का उपयोग देश के खिलाफ गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।

आमतौर पर, ‘म्यूल खाते’ उपलब्ध कराने वाला बिचौलिया व्यक्ति न तो पीड़ितों से संपर्क करता है और न ही फर्जी लिंक भेजता है। इसके बजाय, उनकी भूमिका गुप्त लेकिन महत्वपूर्ण होती है, वे ऐसे खातों की निरंतर आपूर्ति की व्यवस्था और रखरखाव करते हैं, जिनका उपयोग साइबर अपराधी अपनी पहचान उजागर किए बिना ठगी गए पैसे को प्राप्त करने और स्थानांतरित करने के लिए करते हैं।

ये ‘म्यूल खाते’ अक्सर आम लोगों के होते हैं, जिन्हें ‘‘कमीशन’’ और न्यूनतम जोखिम के आश्वासन का लालच दिया जाता है। उन्हें यह कहकर अपने बैंक खातों का पूरा नियंत्रण, जिसमें नेट बैंकिंग विवरण भी शामिल हैं, सौंपने के लिए राजी किया जाता है कि इन खातों का उपयोग थोड़े समय के लिए किया जाएगा।

अक्सर एक ही साइबर अपराधी को एक समय में 10 से 30 म्यूल खाते उपलब्ध कराए जाते हैं। इतना ही नहीं कई मामलों में, बैंक खाते फर्जी कंपनियों के नाम पर खोले जाते हैं, ताकि एक ही दिन में 40 लाख रुपये जैसी बड़ी रकम का लेन-देन बिना किसी संदेह के करना संभव हो जाता है।

केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों और अन्य कानून लागू करने वाली एजेंसियों का मानना है कि ‘म्यूल खाते’ उपलब्ध कराने वाले बिचौलिये सीधे तौर पर पीड़ित को शिकार नहीं बनाते, लेकिन कमीशन लेकर धन शोधन में अहम भूमिका निभाते हैं, जिसमें धोखाधड़ी से प्राप्त धन को तेजी से कई खातों में स्थानांतरित किया जाना और पकड़े जाने से बचने के लिए इसे छोटे-छोटे लेन-देन में विभाजित करना शामिल है।

भाषा

शफीक दिलीप

दिलीप


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