भोजशाला-कमाल मौला परिसर पर फैसले से पहले धार में सुरक्षा कड़ी, 1,200 पुलिसकर्मी तैनात

भोजशाला-कमाल मौला परिसर पर फैसले से पहले धार में सुरक्षा कड़ी, 1,200 पुलिसकर्मी तैनात

भोजशाला-कमाल मौला परिसर पर फैसले से पहले धार में सुरक्षा कड़ी, 1,200 पुलिसकर्मी तैनात
Modified Date: May 15, 2026 / 02:11 pm IST
Published Date: May 15, 2026 2:11 pm IST

धार, 15 मई (भाषा) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर विवाद पर शुक्रवार को फैसला सुनाए जाने से पहले धार शहर और परिसर के आसपास करीब 1,200 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।

11वीं सदी के इस स्मारक पर हिंदू और मुस्लिम समुदाय लंबे समय से दावा करते रहे हैं, जबकि जैन समुदाय के एक समूह ने भी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) संरक्षित इस स्थल पर अपना दावा जताया है।

धार के जिलाधिकारी राजीव रंजन मीणा ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। प्रशासन ने विवादित स्थल पर अवरोधक लगाकर उसकी घेराबंदी कर दी है।

शुक्रवार की नमाज और अदालत का फैसला एक ही दिन होने के कारण अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।

हिंदू समुदाय भोजशाला को वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है। वहीं, जैन समुदाय के एक याचिकाकर्ता का दावा है कि यह परिसर मध्यकालीन जैन मंदिर और गुरुकुल था।

एएसआई की 2003 की व्यवस्था के तहत हिंदू और मुस्लिम समुदाय क्रमशः मंगलवार और शुक्रवार को यहां पूजा-अर्चना और नमाज अदा करते हैं। हिंदू पक्ष ने इस व्यवस्था को उच्च न्यायालय में चुनौती देते हुए परिसर में पूजा के विशेष अधिकार का अनुरोध किया है।

उच्च न्यायालय ने 11 मार्च 2024 को भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराने का आदेश दिया था। एएसआई ने 22 मार्च 2024 से सर्वेक्षण शुरू किया और 98 दिन तक चले विस्तृत सर्वेक्षण के बाद अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश की।

इंदौर खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे शुक्रवार दोपहर करीब ढाई बजे सुनाया जा सकता है।

मुस्लिम समुदाय के लोग शुक्रवार को दोपहर एक बजे से तीन बजे तक परिसर में नमाज अदा करते हैं। इसे देखते हुए प्रशासन ने परिसर में अवरोधक लगा दिए हैं और सोशल मीडिया पर अफवाहों से बचने की सलाह जारी की है।

मीणा ने कहा, “धार स्थित संरक्षित स्मारक से जुड़े मामले में अदालत का फैसला आने की संभावना है। मैं जिले के सभी नागरिकों से शांति बनाए रखने की अपील करता हूं।”

उन्होंने कहा, “किसी भी भ्रामक सूचना या अफवाह पर ध्यान न दें। जिला प्रशासन ऐसी सूचनाओं पर नजर रखे हुए है और कोई आपत्तिजनक सामग्री सामने आने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

मामले की सुनवाई के दौरान हिंदू, मुस्लिम और जैन समुदायों के याचिकाकर्ताओं ने विस्तृत दलीलें पेश करते हुए अपने-अपने समुदाय के लिए परिसर में विशेष पूजा-अधिकार का अनुरोध किया है।

एएसआई ने 2,000 से अधिक पन्नों की अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मस्जिद से पहले यहां धार के परमार राजाओं के काल का एक विशाल ढांचा मौजूद था और वर्तमान विवादित संरचना का निर्माण मंदिर के अवशेषों का पुन: उपयोग करके किया गया।

हिंदू पक्ष का दावा है कि एएसआई के वैज्ञानिक सर्वेक्षण के दौरान मिले सिक्के, मूर्तियां और शिलालेख इस बात का प्रमाण हैं कि परिसर मूल रूप से मंदिर था।

हालांकि, मुस्लिम पक्ष ने अदालत में एएसआई की रिपोर्ट को ‘‘पक्षपातपूर्ण’’ बताते हुए आरोप लगाया कि इसे हिंदू याचिकाकर्ताओं के दावों के समर्थन में तैयार किया गया है।

इस पर एएसआई ने अदालत को बताया कि वैज्ञानिक सर्वेक्षण विशेषज्ञों की मदद से किया गया था, जिनमें मुस्लिम समुदाय के तीन विशेषज्ञ भी शामिल थे।

भाषा सं दिमो मनीषा खारी

खारी


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