अंतरिक्ष से दुनिया को देखकर नजरिया बदल जाता, बहस बेकार लगती है: सुनीता विलियम्स

अंतरिक्ष से दुनिया को देखकर नजरिया बदल जाता, बहस बेकार लगती है: सुनीता विलियम्स

अंतरिक्ष से दुनिया को देखकर नजरिया बदल जाता, बहस बेकार लगती है: सुनीता विलियम्स
Modified Date: January 21, 2026 / 03:50 pm IST
Published Date: January 21, 2026 3:50 pm IST

(कुणाल दत्त)

नई दिल्ली, 21 जनवरी (भाषा) अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने कहा कि अंतरिक्ष में जाने से जीवन को देखने का उनका नजरिया बदल गया है और जब वहां से पृथ्वी को एक ही ग्रह के रूप में देखा जाता है, तो इंसानों का आपस में बहस करना या अलग-अलग मुद्दों पर मतभेद रखना बहुत ही व्यर्थ लगता है।

हाल ही में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा से सेवानिवृत्त हुईं सुनीता विलियम्स(60) इन दिनों भारत के दौरे पर हैं। वह यहां अमेरिकन सेंटर में आयोजित “आइज ऑन द स्टार्स, फीट ऑन द ग्राउंड” नाम के एक कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं।

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इस बातचीत में उन्होंने अपने हाल के अंतरिक्ष मिशन के बारे में बताया। यह मिशन शुरू में केवल आठ दिन का था, लेकिन बोइंग स्टारलाइनर अंतरिक्ष यान में आई तकनीकी खराबियों के कारण वह नौ महीने से ज्यादा समय तक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र (आईएसएस) में रहने को मजबूर हुईं।

उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष यात्रा एक तरह का “टीम का खेल” है और सभी देशों को मिलकर काम करना चाहिए, क्योंकि “हम सब एक ही ग्रह पर बसे हैं।”

विलियम्स ने कहा, “जब आप अंतरिक्ष में पहुंचते हैं, तो सबसे पहले हर इंसान अपना वतन ढूंढने की कोशिश करता है। मेरे पिता भारत से और मां स्लोवेनिया से हैं, इसलिए मैं इन दोनों जगहों को खोजती हूं। यही सबसे पहली भावना होती है।”

उन्होंने हालांकि यह भी बताया कि धीरे-धीरे आपकी यह सोच बदल जाती है और पूरी पृथ्वी एक ही घर जैसी लगने लगती है।

उन्होंने कहा, “हमारे ग्रह पर जीवन है। कुछ लोगों को लगता है कि वहां से केवल चट्टानी भूमि दिखती होगी। लेकिन अंतरिक्ष से मैं मौसम के बदलाव, समुद्र के रंगों में फर्क, शैवाल के फैलने, उत्तर और दक्षिण ध्रुव के पास बर्फ की चादरों को साफ देख सकती थी।”

उन्होंने कहा कि ऊपर से इस खूबसूरत और जीवंत ग्रह को देखने से जीवन को समझने का नजरिया बदल जाता है।

अंतरिक्ष यात्री ने कहा, “इससे लोगों के बीच मतभेदों को देखने का तरीका भी बदल जाता है। ऐसा महसूस होता है कि हम सब एक हैं और हमें मिलकर, और सुविधाजनक तरीके से साथ काम करना चाहिए।”

उन्होंने कहा, “ईमानदारी से कहूं तो मुझे ऐसा लगने लगा कि कोई किसी बात पर झगड़ा क्यों करता है। मैं जानती हूं, मैं शादीशुदा हूं, मेरे पति हैं, हम भी बहस करते हैं। इसलिए मैं तर्क-वितर्क को समझती हूं। लेकिन जब आप उस नजरिए से पृथ्वी को देखते हैं, तो यह सब बहुत ही व्यर्थ सा लगता है।”

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें किसी चीज से डर लगता है, तो उन्होंने मजाकिया अंदाज में जवाब दिया।

उन्होंने कहा, “मुझे अब भी कई चीजों से डर लगता है। जहां मैं रहती हूं, वहां कुछ भालू हैं। मुझे डर लगता है कि कहीं मैं उनमें से किसी को जगा न दूं। वे अभी सो रहे हैं, और यह अच्छी बात है।”

उन्होंने कहा, “इसलिए आपको ब्रह्मांड में और पृथ्वी पर अपनी जगह को समझना चाहिए और अपने आसपास मौजूद जानवरों के प्रति सावधान व सम्मानपूर्ण होना चाहिए।”

सुनीता विलियम्स 27 दिसंबर 2025 को नासा से सेवानिवृत्ति हुई हैं। 27 साल के शानदार करियर में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर तीन मिशन पूरे किए और मानव अंतरिक्ष उड़ान से जुड़े कई रिकॉर्ड बनाए।

सुनीता विलियम्स ने अंतरिक्ष में कुल 608 दिन बिताए हैं। वह अंतरिक्ष में सबसे अधिक समय बिताने के मामले में नासा के अंतरिक्ष यात्रियों की सूची में दूसरे स्थान पर हैं।

नासा ने 20 जनवरी को जारी एक बयान में बताया कि वह किसी अमेरिकी अंतरिक्ष मिशन में सबसे अधिक समय तक शामिल रहे अंतरिक्ष यात्रियों की सूची में छठे स्थान पर हैं। इस मामले में वह नासा के अंतरिक्ष यात्री बुच विलमोर के साथ बराबरी पर हैं। दोनों ने नासा के बोइंग स्टारलाइनर और स्पेसएक्स क्रू-9 मिशन के दौरान 286-286 दिन अंतरिक्ष में बिताए।

सुनीता विलियम्स ने कुल नौ बार स्पेसवॉक यानी अंतरिक्ष में चहलकदमी (कुल 62 घंटे छह मिनट तक) भी की हैं। इसके अलावा, वह अंतरिक्ष में मैराथन करने वाली दुनिया की पहली व्यक्ति भी हैं।

ओहायो में दीपक पांड्या और उर्सुलीन बोनी पांड्या के घर 19 सितंबर 1965 को जन्मीं एवं अमेरिकी नौसेना की पूर्व कैप्टन सुनीता विलियम्स आज भी भारत में प्रेरणास्रोत बनी हुई हैं।

भाषा जोहेब धीरज

धीरज


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