सेंथिल बालाजी का ट्रांसफॉर्मर खरीद में अनियमितता से इनकारा,अम्बुमणि ने सीबीआई जांच का स्वागत किया
सेंथिल बालाजी का ट्रांसफॉर्मर खरीद में अनियमितता से इनकारा,अम्बुमणि ने सीबीआई जांच का स्वागत किया
चेन्नई, 29 अप्रैल (भाषा) मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा ट्रांसफॉर्मर खरीद मामले में सीबीआई जांच का आदेश दिए जाने के बाद द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के वरिष्ठ नेता और तत्कालीन बिजली मंत्री सेंथिल बालाजी ने दावा किया कि निविदा प्रक्रिया में सभी नियमों का पालन किया गया था।
उच्च न्यायालय ने बुधवार को तमिलनाडु सरकार द्वारा 45,000 ट्रांसफॉर्मर की खरीद में कथित अनियमितताओं की सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) जांच का आदेश दिया। यह आदेश उन दावों के बाद आया है जिनमें कहा गया था कि 2021 से 2023 के बीच जब सेंथिल बालाजी बिजली मंत्री थे, सरकारी खजाने को 397 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
ट्रांसफॉर्मर खरीद में किसी भी गड़बड़ी से इनकार करते हुए द्रमुक नेता ने संवाददाताओं से कहा कि खरीद की प्रक्रिया 1987 से शुरू हुई थी और ‘अब तक उन्हीं प्रक्रियाओं का पालन किया गया है।’
इस बीच, पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अम्बुमणि रामदास ने मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए सीबीआई जांच के आदेश का स्वागत किया है।
उन्होंने कहा कि एक निविदा प्रक्रिया में 20 से अधिक बोलीदाता भाग लेते हैं और कई बोलीदाता एक ही कीमत उद्धृत करते हैं।
बालाजी ने बताया कि निविदा को एक जांच समिति और बोर्ड पैनल द्वारा अंतिम रूप दिया जाता है, जिसके बाद खरीद का आदेश दिया जाता है।
पूर्व बिजली मंत्री ने कहा कि पिछली सरकार के दौरान भी इसी निविदा प्रक्रिया का पालन किया गया था, लेकिन एजेंसी ने मामला इस तरह दर्ज किया है जैसे पिछले चार-पांच वर्षों में ही अनियमितताएं हुई हों।
उन्होंने दावा किया, ‘अनियमितता की कोई गुंजाइश नहीं है और इस स्तर पर सरकार को कोई नुकसान नहीं हुआ है।’
बालाजी ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का संदर्भ देते हुए आरोप लगाया कि अन्नाद्रमुक और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) चुनिंदा तरीके से मामलों को संभाल रहे हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिस एजेंसी ने ट्रांसफॉर्मर खरीद के संबंध में अदालत में मामला दायर किया है, वह एक राजनीतिक दल के पक्ष में काम कर रही है।
इस बीच, ट्रांसफॉर्मर खरीद मामले में मद्रास उच्च न्यायालय के सीबीआई जांच के आदेश का स्वागत करते हुए पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अम्बुमणि रामदास ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ द्रमुक सरकार और पुलिस की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ‘व्यवस्थित तरीके से इस घोटाले की जांच में बाधा डाल रही थी।’
यहां जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि पीएमके पिछले दो वर्षों से इस खरीद की जांच की मांग पर अड़ी हुई थी।
रामदास ने कहा, ‘6 जुलाई, 2023 को ‘अरप्पोर इयक्कम’ ने तमिलनाडु पुलिस की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा में एक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें इन आरोपों की जांच के लिए उच्च न्यायालय की देखरेख में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का अनुरोध किया गया था। हालांकि, द्रमुक सरकार इस अनुरोध पर कोई भी कार्रवाई करने में विफल रही।’
पीएमके नेता ने यह भी आरोप लगाया कि द्रमुक शासन के दौरान अनियमितताएं केवल ट्रांसफॉर्मर की खरीद तक ही सीमित नहीं थीं, बल्कि 20 रुपये प्रति यूनिट जैसी अत्यधिक दरों पर बिजली की खरीद और ‘बाजार मूल्य से 350 प्रतिशत अधिक कीमत पर स्मार्ट मीटर खरीदने के सौदों’ में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई है।
भाषा सुमित संतोष
संतोष

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