सेवा पखवाड़ा: इंडिया गेट पर रंगों की जगह रंग-बिरंगे पौधों से रंगोली बनाने की योजना

सेवा पखवाड़ा: इंडिया गेट पर रंगों की जगह रंग-बिरंगे पौधों से रंगोली बनाने की योजना

सेवा पखवाड़ा: इंडिया गेट पर रंगों की जगह रंग-बिरंगे पौधों से रंगोली बनाने की योजना
Modified Date: September 14, 2026 / 12:05 pm IST
Published Date: September 14, 2026 12:05 pm IST

(वर्षा सागी)

नयी दिल्ली, 14 सितंबर (भाषा) इंडिया गेट पर ‘सेवा पखवाड़ा’ के लिए परंपरागत रूप से रंगों और पाउडर से बनने वाली रंगोली के बजाय रंग-बिरंगे पौधों से विशाल रंगोली बनाए जाने की योजना है। वन विभाग ने इसे तैयार करने और इसके रखरखाव के लिए एक एजेंसी की तलाश शुरू की है।

‘पीटीआई-भाषा’ को मिले आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, प्रस्तावित ‘प्लांटर रंगोली’ (गमलों में लगे रंग-बिरंगे पौधों से बनाई जाने वाली रंगोली) 108 फुट लंबी और 108 फुट चौड़ी होगी तथा 30 दिन तक इसके रखरखाव की व्यवस्था भी की जाएगी।

वन एवं वन्यजीव विभाग के केंद्रीय वन प्रभाग ने रंग-बिरंगे पौधों से यह रंगोली तैयार करने के लिए अनुभवी विशेषज्ञों और डिजाइनरों से निविदाएं आमंत्रित की हैं।

विभाग के एक अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि ‘प्लांटर रंगोली’ की योजना ‘सेवा पखवाड़ा’ के सिलसिले में बनाई जा रही है। सेवा पखवाड़ा 17 सितंबर से दो अक्टूबर तक मनाया जाता है और इस दौरान विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाती हैं।

हालांकि, प्रस्तावित आयोजन स्थल को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है लेकिन निविदा में इंडिया गेट को संभावित स्थल बताया गया है और कहा गया है कि यह अंतिम मंजूरी एवं स्थल की उपलब्धता पर निर्भर करेगा।

निविदा के अनुसार, चयनित एजेंसी ‘प्लांटर रंगोली’ तैयार करने के साथ 30 दिन तक उसका रखरखाव भी करेगी।

विभाग ने दो-बोली प्रणाली के तहत प्रतिष्ठित, अनुभवी और पात्र निविदाकर्ताओं से बोलियां आमंत्रित की हैं। निविदा प्रक्रिया में तकनीकी प्रस्तुति भी शामिल है।

प्रस्तावित सजावट में रंग-बिरंगे पौधों का इस्तेमाल कर रंगोली जैसी बड़ी आकृति तैयार की जाएगी।

निविदा प्रक्रिया ई-निविदा प्रणाली के जरिये पूरी की जा रही है। इसमें हिस्सा लेने वाली एजेंसियों के पास डिजिटल हस्ताक्षर और दिल्ली सरकार की ई-खरीद प्रणाली में पंजीकरण होना जरूरी है। निविदा में बयाना राशि (निविदा के साथ जमा की जाने वाली सुरक्षा राशि) जमा करने का भी प्रावधान है, हालांकि पात्र श्रेणियों को इससे छूट दी गई है।

वन विभाग ने इस काम के लिए अनुभवी भू-दृश्य विशेषज्ञ या डिजाइनर की मांग की है और चयनित एजेंसी को सजावट का रखरखाव भी करना होगा।

पौधों से बनाई जाने वाली यह रंगोली उन पारंपरिक रंगोलियों से अलग होगी, जिन्हें आमतौर पर रंगों या पाउडर से बनाया जाता है।

इस परियोजना को एक बड़ी सजावटी स्थापना के रूप में प्रस्तावित किया गया है।

भाषा सिम्मी मनीषा

मनीषा


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