असंतुष्ट विधायक जयचंद्र से मिले मुख्यमंत्री शिवकुमार
असंतुष्ट विधायक जयचंद्र से मिले मुख्यमंत्री शिवकुमार
बेंगलुरु, आठ अगस्त (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं सिरा से विधायक टी. बी. जयचंद्र से मुलाकात की। जयचंद्र ने हाल में हुए राज्य मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें शामिल न किए जाने पर नाराजगी व्यक्त की थी।
सत्तारूढ़ दल के भीतर बढ़ते असंतोष को शांत करने के स्पष्ट प्रयास के तहत यह मुलाकात हुई।
शुक्रवार रात यह बैठक ऐसे समय में हुई जब कांग्रेस नेतृत्व ने उन वरिष्ठ नेताओं के असंतोष को दबाने के प्रयास तेज कर दिए, जिन्हें तीन अगस्त के मंत्रिमंडल विस्तार में मंत्री पद नहीं दिया गया।
यह विस्तार शिवकुमार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के दो महीने बाद हुआ।
सरकार गठन को लेकर पैदा हुई पेचीदा स्थिति के बीच शिवकुमार व्यक्तिगत रूप से असंतुष्ट नेताओं से संपर्क कर रहे हैं। वहीं, पार्टी ने भी अपने वरिष्ठ नेताओं को मैदान में उतार दिया है, ताकि असंतुष्ट नेताओं की चिंताओं को दूर किया जा सके और भीतर उठ रही नाराजगी को बड़े राजनीतिक संकट का रूप लेने से रोका जा सके।
जयचंद्र से मुलाकात के बाद शिवकुमार ने पत्रकारों से कहा, ‘‘अब, राज्यपाल ने उन्हें (जयचंद्र) अस्थायी अध्यक्ष के रूप में मनोनीत किया है। इसके अलावा, हम दोनों अच्छे मित्र हैं और भाइयों की तरह हैं। आगे विधानसभा का संचालन उन्हें ही करना है। इसलिए मैं उनसे यह जानने के लिए आया हूं कि आगे क्या-क्या किया जाना है और किस तरह की प्रक्रिया अपनाई जानी है।”
शिवकुमार ने कहा कि विधानसभा के अस्थायी अध्यक्ष के रूप में जयचंद्र एक विशेष संवैधानिक पद पर हैं और उन्होंने इस पद से जुड़ी गरिमा बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘वह हमारी विधानसभा के अस्थायी अध्यक्ष हैं। मुख्यमंत्री को अध्यक्ष के निवास और कार्यालय जाना होता है। विधानसभा अध्यक्ष को किसी अन्य पद पर बैठे व्यक्ति की तरह नहीं देखा जा सकता। इस पद की अपनी एक गरिमा और प्रतिष्ठा होती है।”
मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से कथित तौर पर बेहद नाराज जयचंद्र ने यहां तक संकेत दिया था कि वह विपक्ष की बेंच पर बैठेंगे। हालांकि, मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद उनके तेवर नरम पड़ते नजर आए।
जयचंद्र ने कहा, “फिलहाल मैं विधानसभा अध्यक्ष हूं। आपको इसका परिणाम जल्द दिखाई देगा। सभी नाराजगी दूर हो गई है।”
उन्होंने कहा, “मैंने कार्यालय का कामकाज संभालना शुरू कर दिया है। यह मेरा संवैधानिक दायित्व है। संविधान के तहत मुझे जो जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, उनका निर्वहन करना मेरा कर्तव्य है। अगर मैं ऐसा नहीं करता हूं तो लोग मुझे कायर कहेंगे।”
भाषा खारी प्रशांत
प्रशांत

Facebook


