शिवकुमार ने केंद्र से सूखा राहत राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा अंतरिम सहायता के रूप में मांगा

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शिवकुमार ने केंद्र से सूखा राहत राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा अंतरिम सहायता के रूप में मांगा

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  • Publish Date - September 24, 2026 / 12:30 AM IST,
    Updated On - September 24, 2026 / 12:30 AM IST

बेंगलुरु, 23 सितंबर (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से राज्य के सूखा राहत ज्ञापन में मांगी गई राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा अंतरिम वित्तीय सहायता के रूप में जारी करने का आग्रह किया। उन्होंने राज्य में सूखे की बिगड़ती स्थिति का हवाला देते हुए यह मांग की।

मोदी को लिखे पत्र में शिवकुमार ने 10 सितंबर को भेजे गए अपने पत्र का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने सूखा घोषित किए गए 101 तालुकों में तत्काल राहत उपायों के लिए 3,705.30 करोड़ रुपये की सहायता मांगी थी।

उन्होंने कहा कि राज्य में सूखे की स्थिति और गंभीर हो गई है तथा सूखा प्रबंधन, 2020 की नियमावली में निर्धारित मानकों के तहत वैज्ञानिक आकलन के आधार पर राज्य सरकार ने अतिरिक्त 76 तालुकों को भी सूखा प्रभावित घोषित किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘इससे सूखा प्रभावित तालुकों की कुल संख्या बढ़कर 177 हो गई है।’’

उन्होंने कहा कि 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून सत्र के अंत तक यह संख्या 200 से अधिक हो सकती है।

शिवकुमार ने बताया कि नए घोषित सूखा प्रभावित तालुकों में नुकसान और क्षति का आकलन किया जा रहा है। आकलन पूरा होने के बाद राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष (एनडीआरएफ) के तहत सहायता के लिए अतिरिक्त ज्ञापन भेजा जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून कर्नाटक में बारिश का प्रमुख मौसम है और जून-अगस्त के दौरान होने वाली बारिश न केवल खरीफ कृषि के लिए बल्कि जलाशयों को भरने, जल विद्युत उत्पादन, चारे की उपलब्धता और भूजल पुनर्भरण के लिए भी महत्वपूर्ण है।

शिवकुमार ने विशेष रूप से कावेरी बेसिन के जलाशयों में कम जल भंडारण को लेकर चिंता जताई और कहा कि आने वाले महीनों में इसका असर बेंगलुरु तथा आसपास के जिलों में पेयजल उपलब्धता पर पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून अब अंतिम चरण में है और राज्य में बारिश की कुल कमी लगातार बनी हुई है, ऐसे में आने वाले महीनों में सूखे की स्थिति और गंभीर हो सकती है तथा गर्मियों में इसका असर और बढ़ सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बारिश और मिट्टी में नमी की स्थिति लगातार खराब होने से बड़े पैमाने पर फसल को नुकसान हो सकता है, जो 40 लाख हेक्टेयर से अधिक तक पहुंच सकता है।

शिवकुमार ने बताया कि नुकसान और क्षति का प्रत्यक्ष आकलन करने के लिए एक अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल (आईएमसीटी) के राज्य दौरे का प्रस्ताव है।

भाषा रवि कांत रवि कांत वैभव

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