शोपियां की अदालत ने दारुल उलूम सिराज-उल-उलूम को फिर से खोलने का आदेश दिया
शोपियां की अदालत ने दारुल उलूम सिराज-उल-उलूम को फिर से खोलने का आदेश दिया
श्रीनगर, 24 सितंबर (भाषा) जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले की एक स्थानीय अदालत ने बृहस्पतिवार को दारुल उलूम जामिया सिराज-उल-उलूम को फिर से खोलने का आदेश दिया। इस मदरसे को प्रशासन ने साल की शुरुआत में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत गैरकानूनी संगठन घोषित किया था।
प्रधान एवं सत्र न्यायाधीश महमूद अहमद चौधरी की अदालत ने निर्देश दिया कि मामले का पूरी तरह निपटारा होने तक संस्थान को फिर से खोलने और शैक्षणिक गतिविधियां शुरू करने की अनुमति दी जाए।
संस्थान की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता एस. एम. इकबाल ने संवाददाताओं से कहा कि अंतरिम राहत दी गई है, लेकिन मुख्य मामला अभी विचाराधीन है।
इकबाल ने कहा, ‘‘मुख्य मुकदमे की सुनवाई अभी जारी है, लेकिन हमने अंतरिम आवेदन इसलिए दायर किया क्योंकि बच्चों का भविष्य और उनकी शिक्षा दांव पर थी। सिराज-उल-उलूम में करीब 1,200 विद्यार्थी पढ़ रहे थे, जिनमें लगभग 400 छात्र आवासीय थे क्योंकि यह रहने और भोजन की सुविधा वाला संस्थान है।’’
उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थान ने अदालत को बताया कि उसकी संपत्तियां खराब हो रही थीं और सरकार ने उचित प्रशासनिक व्यवस्था नहीं की थी।
इकबाल ने कहा कि जब तक गवाहों के बयान दर्ज नहीं हो जाते और मुकदमे की सुनवाई पूरी होकर यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि सिराज-उल-उलूम में कोई गैरकानूनी गतिविधि चल रही थी, तब तक संस्थान को बंद नहीं रखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘यह साबित करने में समय लगेगा कि सब कुछ भारत के संविधान के अनुरूप है और कोई गैरकानूनी गतिविधि नहीं की गई।’’
अधिवक्ता ने कहा कि न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि प्रथम दृष्टया इस चरण में सरकार की ओर से पेश सामग्री पूरे संस्थान को पूरी तरह बंद रखने को उचित ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने बताया कि संस्थान को दोबारा खोलने के आदेश के साथ यह शर्त रखी गई है कि सरकार संचालन की निगरानी के लिए तीन सदस्यीय पर्यवेक्षण समिति गठित करेगी।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि समाचार पत्रों और मीडिया के माध्यम से व्यापक प्रचार किया जाए, ताकि जो विद्यार्थी संस्थान छोड़ चुके हैं-चाहे उन्होंने कहीं और दाखिला लिया हो या नहीं-वे बिना किसी बाधा के वापस लौट सकें।
अधिवक्ता बशारत अब्दुल्ला ने कहा कि सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में आरोप लगाया गया था कि संस्थान में गैरकानूनी गतिविधियां की जा रही थीं।
उन्होंने कहा कि इसके जवाब में सिराज-उल-उलूम और आवेदकों की ओर से सभी संबंधित दस्तावेज और साक्ष्य अदालत के समक्ष पेश किए गए।
भाषा रवि कांत रवि कांत नरेश
नरेश

Facebook


