ओम बिरला ने केंद्रीय विधानमंडल की कार्यवाही पर आधारित 89 खंडों का विमोचन किया

ओम बिरला ने केंद्रीय विधानमंडल की कार्यवाही पर आधारित 89 खंडों का विमोचन किया

ओम बिरला ने केंद्रीय विधानमंडल की कार्यवाही पर आधारित 89 खंडों का विमोचन किया
Modified Date: May 28, 2026 / 04:30 pm IST
Published Date: May 28, 2026 4:30 pm IST

नयी दिल्ली, 28 मई (भाषा) लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बृहस्पतिवार को दिल्ली विधानसभा में केंद्रीय विधानमंडल (सेंट्रल लेजिस्लेटिव एसेम्बली 1924-1930) की कार्यवाही पर आधारित 89 खंडों का विमोचन किया और कहा कि यह दुर्लभ दस्तावेज युवा पीढ़ी के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में काम करेगा।

संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रीजीजू, दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता और दिल्ली के विधायी कार्य मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा के साथ, बिरला ने विधानसभा की पत्रिका ‘विधान चेतना’ के पहले अंक की भी शुरुआत की।

अपने संबोधन में बिरला ने इस बात पर जोर दिया कि इन 89 खंडों के संकलन और प्रकाशन से ब्रिटिश शासन के दौरान विधायी कार्यप्रणाली के बारे में जनता की जागरूकता बढ़ेगी।

उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक दस्तावेज लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले सभी व्यक्तियों के साथ-साथ देश भर के जन प्रतिनिधियों को भी प्रेरित करेगा।

बिरला ने दिल्ली विधानसभा भवन के महत्व पर भी प्रकाश डाला, जहां से ब्रिटिश शासन के दौरान केंद्रीय विधानमंडल संचालित होता था।

बिरला ने कहा कि तथ्य-आधारित बहसें न केवल संवैधानिक संस्थाओं को मजबूत करती हैं बल्कि उनकी गरिमा को भी बढ़ाती हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसी बहसों, जिनमें सहमति और असहमति दोनों शामिल होती हैं, ने भारतीय लोकतंत्र को वैश्विक मंचों पर एक मार्गदर्शक शक्ति के रूप में कार्य करने में सक्षम बनाया है।

रीजीजू ने ऐतिहासिक दस्तावेजों के संरक्षण के प्रयासों के लिए दिल्ली विधानसभा और उसके अध्यक्ष की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल लोकतंत्र को मजबूत करने में सहायक होगी।

उन्होंने जनप्रतिनिधियों को संसद और विधानसभाओं का उपयोग केवल अपनी छवि सुधारने के मंच के रूप में करने के खिलाफ चेतावनी दी और कहा कि ऐसे कृत्यों से संवैधानिक संस्थाओं को नुकसान पहुंच सकता है।

उन्होंने संसदीय अभिलेखों के संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि यदि इसे प्राथमिकता नहीं दी गई, तो इससे लोकतंत्र की नींव कमजोर हो सकती है।

रीजीजू ने कहा कि संवैधानिक निकायों को सम्मान दिलाना सबकी जिम्मेदारी है, लेकिन कुछ लोग जनता द्वारा अस्वीकार किए जाने पर उन पर हमला करने लगते हैं।

भाषा राजकुमार संतोष

संतोष


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