सिद्धरमैया और कुमारस्वामी के बीच जाति और ‘कुर्सी’ की राजनीति को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप

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सिद्धरमैया और कुमारस्वामी के बीच जाति और 'कुर्सी' की राजनीति को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप

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  • Publish Date - February 23, 2026 / 12:18 AM IST,
    Updated On - February 23, 2026 / 12:18 AM IST

बेंगलुरु, 22 फरवरी (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और केंद्रीय मंत्री एच डी कुमारस्वामी के बीच रविवार को तीखी बयानबाज़ी देखने को मिली। दोनों नेताओं ने जातीय राजनीति, परिवारवाद और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए।

मुख्यमंत्री सिद्धरमैया द्वारा कुमारस्वामी के इस आरोप को खारिज किए जाने के बाद विवाद और तेज हो गया कि उन्होंने (मुख्यमंत्री ने) सत्ता में बने रहने के लिए जाति का सहारा लिया है।

सिद्धरमैया ने जद(एस) नेतृत्व पर पलटवार करते हुए कहा, ‘‘मैंने इस आरोप को हल्के में लिया है कि मैंने कुर्सी के लिए जाति को मुद्दा बनाया है।’’

मुख्यमंत्री ने जद(एस) संरक्षक एच डी देवेगौड़ा और उनके परिवार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘कुमारस्वामी और उनके पूजनीय पिता देवेगौड़ा निश्चित रूप से जातिवादी नहीं हैं; वे तो अपनी ही जाति के खिलाफ हैं। इससे भी महत्वपूर्ण यह है कि वे परिवार-केंद्रित हैं। उनके लिए जाति केवल एक वोट बैंक है।’’

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘जद(एस) के अतीत, वर्तमान और भविष्य के शीर्ष नेता गौड़ा परिवार के ही सदस्य होंगे।’’ साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि वोक्कालिगा समुदाय के नेताओं को राजनीतिक रूप से आगे बढ़ाने का काम कांग्रेस ने किया है।

उन्होंने कहा, ‘‘केंगल हनुमंथैया से लेकर एस एम कृष्णा तक, सैकड़ों वोक्कालिगा नेताओं को तैयार किया गया है। अगर केंगल हनुमंथैया, कदिदल मंजप्पा और एस एम कृष्णा मुख्यमंत्री बने, तो यह कांग्रेस की वजह से ही संभव हुआ।’’

सिद्धरमैया द्वारा उनके पिता के विरुद्ध की गई टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कुमारस्वामी ने कहा, “आप सामाजिक न्याय के समर्थक नहीं बल्कि उसके विनाशक हैं। यह चौंकाने वाली बात है कि आप देवेगौड़ा पर उंगली उठा रहे हैं, जिन्होंने आपको राजनीतिक ताकत प्रदान की।”

उन्होंने कहा कि यदि देवेगौड़ा केवल जाति या पारिवारिक विचारों से प्रेरित होते, तो सिद्धरमैया राजनीति में इतना आगे नहीं बढ़ पाते।

कुमारस्वामी ने कहा, ‘‘यदि उन्होंने उस समय केवल अपनी जाति और परिवार के बारे में सोचा होता, तो आप न तो वित्त मंत्री बनते और न ही किसी निगम के अध्यक्ष का पद हासिल कर पाते।’’

जद (एस) छोड़कर गए कई वोक्कालिगा नेताओं की सूची का मुख्यमंत्री द्वारा जिक्र किए जाने पर कुमारस्वामी ने कहा, “आपकी ही तरह, उन्होंने भी देवेगौड़ा की मेहनत और बलिदान के कारण सत्ता का आनंद लिया और रुतबा हासिल किया, और बाद में पाला बदल लिया। जैसा कि आप कहते हैं, यदि देवेगौड़ा का मानना ​​होता कि सिर्फ परिवार ही मायने रखता है, तो सूची में शामिल कोई भी व्यक्ति विधायक, मंत्री या सांसद नहीं बनता-आप भी नहीं! आपका क्या कहना है?”

उन्होंने सिद्धरमैया द्वारा अपने बचाव में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का हवाला दिए जाने पर भी आपत्ति जताई।

कुमारस्वामी ने मुख्यमंत्री के इस दावे को खारिज किया कि वोक्कालिगा नेताओं का ध्यान केवल कांग्रेस ने ही रखा है।

उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में सिद्धरमैया के दूसरे कार्यकाल और उनके तथा उनके उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच कथित सत्ता संघर्ष पर भी सवाल उठाए।

कुमारस्वामी ने कहा कि सिद्धरमैया के दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने से पहले उनके और शिवकुमार के बीच एक समझौता हुआ था तथा अब उन्हें उदारता दिखाते हुए इसे सार्वजनिक रूप से प्रकट करना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘आपके सामाजिक न्याय में कोई नैतिक आधार नहीं है। अगर होता तो मल्लिकार्जुन खरगे आपसे पहले मुख्यमंत्री बन चुके होते।’’

बाद में रायचूर में पत्रकारों से बातचीत में कुमारस्वामी ने कहा कि मुख्यमंत्री जो अपनी कुर्सी बचाने के लिए अपनी कुरुबा (चरवाहा) जाति का सहारा ले रहे हैं, उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि देवेगौड़ा ने उन्हें (सिद्धारमैया को) अपनी सरकार में उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री बनाया था।

भाषा शोभना सुरेश

सुरेश