सिद्धरमैया ने मनरेगा को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार की आलोचना की

सिद्धरमैया ने मनरेगा को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार की आलोचना की

सिद्धरमैया ने मनरेगा को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार की आलोचना की
Modified Date: February 23, 2026 / 07:29 pm IST
Published Date: February 23, 2026 7:29 pm IST

चिकबलपुर, 23 फरवरी (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर मनरेगा योजना को समाप्त करने का आरोप लगाया और इसे बहाल करने तक निरंतर आंदोलन जारी रखने का संकल्प लिया।

मुख्यमंत्री ने यहां ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ रैली को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए कानून के माध्यम से ग्रामीण रोजगार योजना को प्रतिस्थापित करने के खिलाफ कांग्रेस पूरे देश में लड़ाई लड़ेगी।

सिद्धरमैया ने आरोप लगाया, “आज पूरे देश में ‘मनरेगा बचाओ’ अभियान शुरू हो गया है। कर्नाटक में भी इसकी शुरुआत हो चुकी है।”

उन्होंने कहा कि केंद्र में भाजपा सरकार ने संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान मनरेगा को रद्द कर दिया और इसके स्थान पर विकसित भारत गारंटी रोजगार आजीविका मिशन-ग्रामीण (वीबी जी राम जी) अधिनियम लागू कर दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना को रद्द करने का कोई औचित्य नहीं था।

उन्होंने याद दिलाया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को 2005 में दिवंगत मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री रहते हुए सोनिया गांधी के नेतृत्व में ग्रामीण मजदूरों, आदिवासियों, छोटे किसानों और महिलाओं को रोजगार प्रदान करने के लिए लागू किया गया था।

सिद्धरमैया ने आरोप लगाया कि इस कानून को संसद में पर्याप्त बहस के बिना ही पारित कर दिया गया।

उन्होंने कहा, “17 दिसंबर, 2025 को केवल आठ घंटे की बहस हुई। 18 दिसंबर को विधेयक पारित हो गया और ग्राम स्वराज अधिनियम लागू हो गया।”

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि मनरेगा को रद्द करने से लगभग 12 करोड़ मजदूर प्रभावित हुए हैं, जिनमें से लगभग 53 प्रतिशत महिलाएं और 28 प्रतिशत अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के हैं।

उन्होंने महात्मा गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि इस योजना का नाम उनके (महात्मा गांधी के) नाम पर रखा गया था क्योंकि उनका मानना ​​था कि गांवों के विकास और ‘ग्राम स्वराज’ के बिना भारत प्रगति नहीं कर सकता।

सिद्धरमैया ने बताया कि मनरेगा के तहत, गांव में काम चाहने वाला कोई भी व्यक्ति ग्राम पंचायत में आवेदन कर सकता था और उसे साल में 100 दिन के रोजगार की गारंटी दी जाती थी, ऐसा न होने पर मुआवजा देना पड़ता था।

सिद्धरमैया ने आरोप लगाया कि नए कानून ने ग्राम पंचायतों की शक्तियों को कम कर दिया और निर्णय लेने का अधिकार केंद्र सरकार के पास स्थानांतरित कर दिया।

उन्होंने कहा, “अब यह तय करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है कि कौन सा काम किया जाएगा। दिल्ली से धनराशि स्वीकृत हुए बिना पंचायत में काम शुरू नहीं हो सकता।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे काम का असमान कार्यान्वयन होगा।

उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक ये मांगें पूरी नहीं हो जातीं, आंदोलन जारी रहेगा।

सिद्धरमैया ने कहा, “जब तक ये मांगें पूरी नहीं हो जातीं, हमारा आंदोलन नहीं रुकेगा।”

भाषा जितेंद्र रंजन

रंजन


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