हस्ताक्षर विवाद: अभिषेक का विस अध्यक्ष को पत्र, शोभनदेब को नेता प्रतिपक्ष के रूप में समर्थन दिया

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हस्ताक्षर विवाद: अभिषेक का विस अध्यक्ष को पत्र, शोभनदेब को नेता प्रतिपक्ष के रूप में समर्थन दिया

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  • Publish Date - June 2, 2026 / 10:35 PM IST,
    Updated On - June 2, 2026 / 10:35 PM IST

कोलकाता, दो मई (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस को पत्र लिखकर पार्टी के उस फैसले को दोहराया, जिसमें शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता नियुक्त किया गया है।

इस पत्र ने कथित हस्ताक्षर जालसाजी मामले में एक नया मोड़ ला दिया है और तृणमूल विधायक दल में मतभेद से सामने आये हालिया परिणाम की अगली कड़ी के संबंध में लगाई जा रही अटकलों को हवा दी है।

सोमवार को दो विधायकों रीताब्रता बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था।

तृणमूल के दो विधायक, कुणाल घोष और आशिमा पात्रा ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि बोस के कार्यालय में अनुपस्थित रहने के कारण, उनके कार्यालय सचिव ने पत्र लेने से इनकार करते हुए कहा कि उन्हें टीएमसी से कोई भी पत्र न लेने के मौखिक निर्देश मिले हैं।

घोष ने कहा, ‘‘कल तक विधानसभा अध्यक्ष हमारे पत्र ले रहे थे। अज्ञात कारणों से आज से कार्यालय ने पत्र लेना बंद कर दिया है। दो विधायकों का आधिकारिक पत्र वह कैसे नहीं ले सकते? क्या यह कोई मजाक है? इस रवैये के साथ, विधानसभा अध्यक्ष किस तरह के लोकतंत्र के संरक्षक हो सकते हैं?’’

पार्टी के एक शीर्ष सूत्र ने बाद में बताया कि पत्र सौंपे जाने में नाकाम रहने को लेकर विधानसभा अध्यक्ष को इसे ईमेल किया गया।

अभिषेक बनर्जी द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र में पात्रा और नयना बंद्योपाध्याय को विधानसभा उपाध्यक्ष और फिरहाद हकीम को मुख्य सचेतक के रूप में नामित किया गया है।

पत्र में अध्यक्ष से दशकों से चली आ रही विधानसभा की परंपरा के आधार पर इन पदों को मान्यता देने का अनुरोध किया गया।

अभिषेक ने 2001 के उस उदाहरण का हवाला दिया, जब तत्कालीन अध्यक्ष हाशिम अब्दुल हलीम ने टीएमसी की सिफारिश पर पंकज बनर्जी को विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता दी थी। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया 2006, 2011, 2016 और 2021 के राज्य चुनावों के बाद भी जारी रही।

बनर्जी ने लिखा, ‘‘2021 में, भाजपा ने शुभेंदु अधिकारी के नाम को विपक्ष के नेता के रूप में प्रस्तावित किया था, जिसे तत्कालीन माननीय अध्यक्ष ने स्वीकार कर लिया था।’’

बनर्जी ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और विपक्ष के नेता नामित किये गए चट्टोपाध्याय द्वारा 15 मई को विधानसभा में अध्यक्ष के चुनाव के बाद उनका हाथ पकड़कर उन्हें उनकी कुर्सी तक ले जाने की परंपरा का भी जिक्र किया।

बनर्जी ने कहा, ‘‘असल में, आपने सदन में चट्टोपाध्याय को विपक्ष के नेता के रूप में पहले ही मान्यता दे दी है।’’ उन्होंने अध्यक्ष का ध्यान इस ओर दिलाया कि उन्होंने चट्टोपाध्याय को विपक्ष के नेता के रूप में भाषण देने के लिए आमंत्रित किया था।

भाजपा के वरिष्ठ मंत्री तापस रॉय ने इस आधार पर पत्र की वैधता पर सवाल उठाया कि इस पर निर्वाचित टीएमसी विधायकों के हस्ताक्षर नहीं हैं।

रॉय ने कहा, ‘‘टीएमसी के भीतर पत्रों की जंग छिड़ी हुई है। पहले शोभनदेब चट्टोपाध्याय का पत्र आया। फिर उनके विधायक रीताब्रता बनर्जी ने इसी मुद्दे पर शिकायत पत्र लिखा। अब कुणाल घोष के मार्फत यह पत्र भेजा गया है।’’

यह ताजा पत्र सीआईडी ​​द्वारा हस्ताक्षर जालसाजी मामले की जांच के मद्देनजर भेजा गया है।

अभिषेक बनर्जी का यह ताजा पत्र ऐसे समय आया है जब ऐसी अफवाह है कि टीएमसी विधायकों का एक वर्ग निष्कासित विधायक रीताब्रता बनर्जी के नेतृत्व में अलग हो सकता है।

राज्य के राजनीतिक गलियारों में पिछले 24 घंटों में कोलकाता के एक होटल और विधायक छात्रावास में बागी विधायकों की बैठकों की खबरें आई थीं, जिसे बनर्जी ने मंगलवार को पूरी तरह से खारिज कर दिया।

रीताब्रता बनर्जी ने विधानसभा परिसर के बाहर पत्रकारों से कहा, ‘‘मुझे ऐसी किसी भी घटना की जानकारी नहीं है, और जो लोग यह दावा कर रहे हैं कि मैंने दक्षिण कोलकाता के एक होटल में बैठक की थी, उन्हें यह साबित करना होगा।’’

हालांकि, चट्टोपाध्याय ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि दलबदल की अटकलों के बावजूद पार्टी के अधिकांश विधायक टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी के साथ ही रहेंगे, और तृणमूल के पुराने नेता संगठन पर अपना नियंत्रण बनाए रखेंगे।

भाषा सुभाष पवनेश

पवनेश