सिख गुरु टिप्पणी विवाद के कारण विधायी कामकाज जारी रखना असंभव हो गया: दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष
सिख गुरु टिप्पणी विवाद के कारण विधायी कामकाज जारी रखना असंभव हो गया: दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष
नयी दिल्ली, 16 जनवरी (भाषा) दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बृहस्पतिवार को कहा कि सदन में छह जनवरी को हुई एक ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण घटना’’ के कारण तीन दिन तक कार्यवाही बाधित रही और ऐसा माहौल बना जिसमें विधायी कामकाज जारी रखना असंभव हो गया।
गुरु तेग बहादुर की शहादत की पिछले साल 350वीं बरसी के अवसर पर दिल्ली सरकार की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम को लेकर छह जनवरी को विधानसभा सत्र में हुई चर्चा के बाद, आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी द्वारा सिख गुरुओं के प्रति कथित तौर पर अनादर दिखाए जाने का मुद्दा एक बड़े राजनीतिक विवाद में तब्दील हो गया है।
आतिशी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर नौवें सिख गुरु का नाम घसीटकर ओछी राजनीति करने का आरोप लगाया है। वह हालांकि इस घटना के बाद दिल्ली विधानसभा की बैठकों में शामिल नहीं हुईं।
पंजाब पुलिस ने जहां कथित रूप से ‘‘छेड़छाड़ किए गए’’ आतिशी के वीडियो क्लिप के उपयोग और प्रसार के संबंध में जालंधर में प्राथमिकी दर्ज की, वहीं दिल्ली विधानसभा ने विशेषाधिकार हनन को लेकर राज्य के शीर्ष पुलिस अधिकारियों से जवाब मांगा है।
गुप्ता ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सात जनवरी को सदन में छह जनवरी की कार्यवाही का शब्दशः प्रतिलेख पढ़ा गया, जिसके बाद विपक्ष की नेता आतिशी को अपना पक्ष स्पष्ट करने का अवसर दिया गया। उन्हें छह जनवरी को भी यह मौका दिया गया था।
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि मामले में पंजाब की फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला, पुलिस, संबंधित अधिकारियों और इस मामले से जुड़े राजनीतिक व्यक्तियों की भूमिकाओं को स्पष्ट किए जाने की जरूरत है और इसके पीछे की कथित साजिश सहित पूरे मुद्दे की गहराई से जांच की जानी चाहिए।
गुप्ता ने कहा कि जब यह मुद्दा पहली बार सदन में उठाया गया तो आतिशी बिना जवाब दिए चली गईं, जबकि वह उसी समय अपना पक्ष स्पष्ट कर सकती थीं। उन्होंने कहा कि सदस्यों द्वारा विधानसभा में सामूहिक रूप से यह मुद्दा सुनने के बाद स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई, जिससे पीठ को कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि यह मुद्दा सात जनवरी को फिर सूचीबद्ध किया गया था, लेकिन इसकी गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए पीठ ने तत्काल निर्णय लेने से परहेज किया। किसी भी चर्चा की अनुमति देने से पहले तथ्यों की समुचित जांच के लिए एक दिन का समय लिया गया।’’
गुप्ता ने कहा कि अगले दिन विधानसभा सचिवालय ने वीडियो साक्ष्यों के माध्यम से शब्दशः रिकॉर्ड की पुष्टि की और इसके बाद आतिशी से फिर सदन में आने को कहा गया ताकि वह स्पष्टीकरण दे सकें या खेद प्रकट कर सकें और अपना बचाव रिकॉर्ड पर रख सकें।
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि इस तरह के विवाद तब पैदा होते हैं जब भावनात्मक जुड़ाव, श्रद्धा और समर्पण की कमी होती है, जिससे ऐसी बातें निकल जाती हैं जो भावनाओं को आहत करती हैं।
गुप्ता ने कहा कि सदन में कोई भी चर्चा कभी नेता प्रतिपक्ष के विचार व्यक्त किए बिना समाप्त नहीं हुई। उन्होंने जोर देकर कहा कि सदन के नेता और नेता प्रतिपक्ष महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
उन्होंने कहा कि चर्चा में भाग न लेना, कार्यवाही के दौरान समुचित सम्मान न देना, सदन छोड़ देना और इसके बाद बार-बार बुलाए जाने के बावजूद सत्र के बाकी हिस्से में अनुपस्थित रहना गंभीर चिंता का विषय है।
दिल्ली विधानसभा ने आतिशी को हाल में समाप्त हुए शीतकालीन सत्र में सिख गुरुओं के खिलाफ कथित ‘‘अपमानजनक टिप्पणी’’ किए जाने के संबंध में 19 जनवरी तक अपना लिखित बयान जमा करने का बृहस्पतिवार को निर्देश दिया।
भाषा सिम्मी मनीषा
मनीषा

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