एसआईआर से बंगाल में असली मतदाताओं का मताधिकार छिनने का खतरा: ममतस

एसआईआर से बंगाल में असली मतदाताओं का मताधिकार छिनने का खतरा: ममतस

एसआईआर से बंगाल में असली मतदाताओं का मताधिकार छिनने का खतरा: ममतस
Modified Date: March 31, 2026 / 05:28 pm IST
Published Date: March 31, 2026 5:28 pm IST

कोलकाता, 31 मार्च (भाषा) तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को लिखे कड़े शब्दों वाले पत्र में मंगलवार को भाजपा पर आरोप लगाया कि वह ‘फॉर्म 6’ आवेदनों के जरिए पश्चिम बंगाल के बाहर के मतदाताओं को इस राज्य की मतदाता सूची में, बड़ी संख्या में गैर-कानूनी तरीके से शामिल कराने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने इसे ‘‘भाजपा द्वारा, निर्वाचन आयोग के साथ मिलकर, लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों में दखल देने का एक और सुनियोजित प्रयास’’ करार दिया।

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने यह पत्र पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के सोमवार को लगाए गए उस आरोप के 24 घंटे से भी कम समय के भीतर भेजा, जिसमें उन्होंने कहा था कि भाजपा ने एक ही दिन में लगभग 30,000 ‘फॉर्म 6’ जमा किए हैं ताकि दूसरे राज्यों के निवासियों को पश्चिम बंगाल का मतदाता बनाया जा सके।

बनर्जी ने कुमार को लिखे पत्र में कहा, ‘‘इस बात को लेकर गंभीर चिंताएं हैं कि ये आवेदन ऐसे व्यक्तियों से संबंधित हो सकते हैं जो बंगाल के वास्तविक निवासी नहीं हैं और जिनका राज्य से कोई वैध संबंध नहीं है। बताया जाता है कि बिहार, हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली में चुनावों से पहले भी इसी तरह की चीज देखी गई थी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अगर ये हरकतें सच हैं, तो ये गैर-कानूनी, असंवैधानिक और बुनियादी तौर पर अलोकतांत्रिक हैं; इनसे गलत इरादे और दुर्भावना झलकती है। किसी संवैधानिक संस्था से ऐसे आचरण की उम्मीद नहीं की जाती। लोगों को पारदर्शिता और अपने मतदान संबंधी अधिकारों की सुरक्षा का अधिकार है।’’

बनर्जी ने कहा कि उन्हें आशंका है कि लगभग 30,000 आवेदनों को निर्वाचन आयोग द्वारा संबंधित बूथ और सभी राजनीतिक दलों को उचित सूचना दिए बिना ही मंज़ूरी दे दी जाएगी।

उच्चतम न्यायालय के 20 फरवरी के आदेश का उल्लेख करते हुए बनर्जी ने कहा कि फॉर्म 6 के आवेदनों पर राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी या किसी अन्य प्रशासनिक अधिकारी का फैसला ‘‘पूरी तरह से गैर-कानूनी और शीर्ष अदालत के आदेश के दायरे से बाहर’’ होगा।

शीर्ष अदालत ने 20 फरवरी के आदेश में कहा था अंतिम मतदाता सूची में नाम शामिल करने या हटाने से जुड़े दावों और आपत्तियों की पड़ताल न्यायिक अधिकारियों द्वारा की जाएगी।

भाषा

नेत्रपाल नरेश

नरेश


लेखक के बारे में