एसकेएम ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन की घोषणा की

एसकेएम ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन की घोषणा की

एसकेएम ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन की घोषणा की
Modified Date: February 24, 2026 / 10:27 pm IST
Published Date: February 24, 2026 10:27 pm IST

कुरुक्षेत्र/नयी दिल्ली, 24 फरवरी (भाषा) संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और अन्य प्रमुख नीतिगत मुद्दों के खिलाफ मंगलवार को देशव्यापी आंदोलन की घोषणा की।

किसान संगठनों के मंच ने कहा कि संसद का बजट सत्र नौ मार्च को दोबारा शुरू होने पर उस दिन दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘श्रमिक-किसान संसद’ का आयोजन किया जाएगा।

एसकेएम के मीडिया प्रकोष्ठ द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, यह निर्णय कुरुक्षेत्र के जाट धर्मशाला में आयोजित एसकेएम राष्ट्रीय परिषद की बैठक में लिया गया।

इसमें पंजाब, हरियाणा, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, महाराष्ट्र और केरल सहित नौ राज्यों के 150 से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

एसकेएम ने कहा कि अगली संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत होने के दिन नौ मार्च को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक संयुक्त किसान मजदूर संसद का आयोजन किया जाएगा।

विज्ञप्ति के मुताबिक 10 मार्च से 13 अप्रैल तक, मोर्चा पंजाब के बरनाला से शुरू होकर पूरे देश में महापंचायतों का आयोजन करेगा, ताकि प्रस्तावित व्यापार समझौते और केंद्र की अन्य ‘कॉर्पोरेट-अनुकूल’ नीतियों के ‘खतरों’ के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके।

बयान में कहा गया है कि 23 मार्च को पूरे भारत में शहीद दिवस को साम्राज्यवाद-विरोधी दिवस के रूप में मनाया जाएगा, जिसकी विस्तृत योजना राज्य स्तर पर तैयार की जाएगी।

एसकेएम ने अपनी मांगों को दोहराया, जिनमें भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर न करना, विद्युत संशोधन विधेयक, बीज विधेयक और वीबी जी राम जी अधिनियम को वापस लेना, चार श्रम संहिताओं को निरस्त करना और सी2+50 प्रतिशत फार्मूले के अनुसार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी देना शामिल है।

इसमें कृषि ऋण माफी और 2013 के भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन (एलएआरआर) अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन की भी मांग की गई।

मोर्चा ने कहा कि नौ मार्च तक देशभर में ग्राम स्तरीय बैठकें आयोजित की जाएंगी।

एसकेएम के मुताबिक किसान स्थानीय डाकघरों तक मार्च निकालकर भारत के राष्ट्रपति को खुले पत्र भी सौंपेंगे, जिसमें केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को बर्खास्त करने की मांग की जाएगी, प्रधानमंत्री से व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर न करने का आग्रह किया जाएगा और केंद्रीय वित्त मंत्री से गेहूं और धान किसानों के लिए बोनस समाप्त करने वाले कथित पत्र को वापस लेने का आग्रह किया जाएगा।

विज्ञप्ति के मुताबिक 27 फरवरी से एसकेएम प्रतिनिधिमंडल विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों और विपक्षी नेताओं से मुलाकात करेगा ताकि केंद्र द्वारा ‘‘शक्तियों के केंद्रीकरण’’ का विरोध किया जा सके तथा जीएसटी अधिनियम के तहत राज्यों की कराधान शक्तियों की बहाली और विभाज्य कर कोष में राज्यों की हिस्सेदारी को 33 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने की मांग की जा सके।

वरिष्ठ किसान नेता राकेश टिकैत ने बैठक को संबोधित करते हुए केंद्र की व्यापार और विदेश नीतियों की आलोचना की।

बैठक में पंजाब, ओडिशा और महाराष्ट्र में किसानों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई की भी निंदा की गई।

बैठक की अध्यक्षता सात सदस्यीय समिति ने की, जिसमें जोगिंदर सिंह उगराहां, राकेश टिकैत, अशोक धवले, आशीष मित्तल, जगमोहन सिंह, राजन क्षीरसागर और जोगिंदर सिंह नैन शामिल थे। प्रतिभागियों ने धर्मशाला परिसर में चौधरी छोटू राम को श्रद्धांजलि भी अर्पित की।

भाषा धीरज रंजन

रंजन


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