सामाजिक कार्यकर्ता जनार्दन बापूराव बोथे को पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा

सामाजिक कार्यकर्ता जनार्दन बापूराव बोथे को पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा

सामाजिक कार्यकर्ता जनार्दन बापूराव बोथे को पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा
Modified Date: May 21, 2026 / 02:49 pm IST
Published Date: May 21, 2026 2:49 pm IST

नयी दिल्ली, 21 मई (भाषा) सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद जनार्दन बापूराव बोथे को 25 मई को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक नागरिक अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा।

बोथे ने छह दशक से अधिक समय सामाजिक सेवा और ग्रामीण उत्थान के लिए समर्पित किया है। वह महाराष्ट्र के गुरुकुंज आश्रम में स्थित अखिल भारतीय श्री गुरुदेव सेवा मंडल के महासचिव हैं, जिसकी स्थापना संत तुकडोजी महाराज ने की थी।

महाराष्ट्र के वाशिम जिले में 1939 में जन्मे बोथे ने एक छात्र के रूप में सेवा मंडल के साथ सेवाकार्य शुरू किया, बाद में वह पूर्णकालिक सेवक बन गए और तुकडोजी महाराज के करीबी सहयोगी बन गए।

उन्होंने संत के निजी सचिव के रूप में कार्य किया और देश भर में कई दौरों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में उनके साथ गए।

1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान, बोथे ने भारतीय सशस्त्र बलों के कर्मियों का मनोबल बढ़ाने के उद्देश्य से एनईएफए सीमा पर आयोजित भजन कार्यक्रमों में भी भाग लिया।

1972 में, उन्होंने राष्ट्र संत श्री तुकडोजी महाराज शिक्षण संस्था की स्थापना की, जिसके तहत महाराष्ट्र के आदिवासी और पिछड़े क्षेत्रों में स्कूल और छात्रावास स्थापित किए गए।

इस पहल के माध्यम से हजारों दलित, आदिवासी और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को शिक्षा और जीवन कौशल प्रशिक्षण प्राप्त हुआ।

इन वर्षों में बोथे ने सेवा मंडल से संबंधित 10,000 से अधिक ग्रामीण शाखाओं, महिला समूहों और युवा संगठनों के नेटवर्क के माध्यम से नशामुक्ति, स्वास्थ्य जागरूकता, मूल्य-आधारित शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास पर केंद्रित कई पहलों का नेतृत्व किया है।

उन्हें समाज सेवा और तुकडोजी महाराज के दर्शन के प्रचार-प्रसार में उनके योगदान के लिए 1992 में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर दलित मित्र संस्था पुरस्कार और 2008 में मराठा विदर्भ भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

भाषा तान्या वैभव

वैभव


लेखक के बारे में