सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामला: 22 आरोपियों को बरी करने के खिलाफ याचिका पर विचार करेगा न्यायालय

सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामला: 22 आरोपियों को बरी करने के खिलाफ याचिका पर विचार करेगा न्यायालय

सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामला: 22 आरोपियों को बरी करने के खिलाफ याचिका पर विचार करेगा न्यायालय
Modified Date: September 28, 2026 / 06:33 pm IST
Published Date: September 28, 2026 6:33 pm IST

नयी दिल्ली, 28 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने गैंगस्टर सोहराबुद्दीन शेख, उसकी पत्नी कौसर बी और सहयोगी तुलसीराम प्रजापति से जुड़े 2005 के कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में सभी 22 आरोपियों को बरी किये जाने संबंधी बंबई उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने लिए सोमवार को सहमति जताई।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सोहराबुद्दीन शेख के भाई नयाबुद्दीन शेख की याचिका पर नोटिस जारी किया। याचिका में बंबई उच्च न्यायालय के सात मई के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें राजस्थान और गुजरात के 21 पुलिस कर्मियों तथा एक फार्महाउस मालिक को बरी कर दिया गया था।

पीठ ने संकेत दिया कि वह आरोपियों को बरी किए जाने से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण गवाहों के बयानों की समीक्षा करेगी।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हम कुछ गवाहों के बयान देखना चाहेंगे। हम मामले का पूरा रिकॉर्ड नहीं मंगा रहे हैं। आप ऐसे तीन-चार बयान हमारे समक्ष रखें जिन्हें आप महत्वपूर्ण मानते हैं। हम आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले की पड़ताल करेंगे।’’

न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि अभियोजन पक्ष के 92 गवाहों का मुकर जाना चिंता का विषय है और इस पहलू पर विचार करना होगा कि मुकदमे की सुनवाई निष्पक्ष और न्यायसंगत थी या नहीं।

उन्होंने कहा, ‘‘92 गवाहों का मुकर जाना चिंता का विषय है। क्या मुकदमे की सुनवाई निष्पक्ष और न्यायसंगत थी… इस पर विचार किया जाना है।’’

याचिका में बंबई उच्च न्यायालय के सात मई के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें रुबाबुद्दीन और नयाबुद्दीन शेख की याचिकाओं को खारिज कर दिया गया था। इन याचिकाओं में सभी 22 आरोपियों को बरी करने संबंधी मुंबई की एक विशेष सीबीआई अदालत के दिसंबर 2018 के फैसले को चुनौती दी गई थी।

उच्चतम न्यायालय द्वारा मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को हस्तांतरित किये जाने के बाद एजेंसी ने इसकी जांच की थी।

मामले में बरी किए गए 22 आरोपियों में से 21 गुजरात और राजस्थान के पुलिस अधिकारी थे। एक अन्य आरोपी गुजरात स्थित उस फार्महाउस का मालिक था जहां अभियोजन पक्ष के अनुसार, सोहराबुद्दीन और कौसर बी को ‘‘अवैध रूप से हिरासत में’’ रखा गया था।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, सोहराबुद्दीन, उसकी पत्नी और प्रजापति हैदराबाद से महाराष्ट्र के सांगली बस से जा रहे थे, तभी 22-23 नवंबर 2005 की रात पुलिस के एक दल ने उन्हें कथित तौर पर हिरासत में ले लिया।

आरोप है कि दंपति और प्रजापति को अलग-अलग वाहनों में ले जाया गया।

सीबीआई के अनुसार, सोहराबुद्दीन 26 नवंबर 2005 को अहमदाबाद के पास गुजरात और राजस्थान पुलिस के कर्मियों के साथ एक कथित मुठभेड़ में मारा गया।

कौसर बी की तीन दिन बाद कथित तौर पर हत्या कर दी गई।

उदयपुर केंद्रीय जेल में बंद प्रजापति को कथित मुठभेड़ का एक अहम गवाह माना जा रहा था। वह 27 दिसंबर 2006 को गुजरात-राजस्थान सीमा के पास पुलिस मुठभेड़ में मारा गया।

उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था मुकदमे की सुनवाई करने वाली अदालत द्वारा बरी करने के फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है।

उच्च न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष का मामला मुख्य रूप से परिस्थितिजन्य सबूतों पर आधारित था और परिस्थितियों की कथित कड़ी में कई कड़ियां गायब थीं।

अदालत ने यह भी कहा था कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा कि सोहराबुद्दीन शेख और कौसर बी का अपहरण गुजरात और राजस्थान पुलिस के कर्मियों ने किया था, या फिर फर्जी मुठभेड़ करने के पीछे कोई मकसद था।

उच्च न्यायालय इस दलील को भी खारिज कर दिया था कि मुकदमे की सुनवाई ठीक से नहीं चली, महज इसलिए कि अभियोजन पक्ष के 92 गवाह मुकर गए थे।

दिसंबर 2018 में आरोपियों को बरी करते हुए, विशेष सीबीआई अदालत ने कहा था कि अभियोजन पक्ष सोहराबुद्दीन, कौसर बी और प्रजापति की हत्या की साजिश रचे जाने का ठोस मामला साबित करने में, या ऐसी साजिश में आरोपियों की भूमिका साबित करने में नाकाम रहा।

सीबीआई ने मुंबई उच्च न्यायालय को बताया था कि उसने बरी किए जाने के फैसले को स्वीकार कर लिया है और वह इसे चुनौती नहीं देगी।

उच्चतम न्यायालय ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी और मुकदमे की सुनवाई गुजरात से मुंबई स्थानांतरित कर दी थी।

शीर्ष अदालत ने 2013 में, प्रजापति से जुड़े कथित मुठभेड़ मामले को सोहराबुद्दीन मामले के साथ संलग्न कर दिया था।

भाषा सुभाष माधव

माधव


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