कुछ बेरोजगार युवा ‘कॉकरोच’ की तरह हैं; व्यवस्था पर हमला करते हैं : सीजेआई सूर्यकांत

कुछ बेरोजगार युवा ‘कॉकरोच’ की तरह हैं; व्यवस्था पर हमला करते हैं : सीजेआई सूर्यकांत

कुछ बेरोजगार युवा ‘कॉकरोच’ की तरह हैं; व्यवस्था पर हमला करते हैं : सीजेआई सूर्यकांत
Modified Date: May 15, 2026 / 04:21 pm IST
Published Date: May 15, 2026 4:21 pm IST

नयी दिल्ली, 15 मई (भाषा) प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कुछ बेरोजगार युवाओं की तुलना ‘‘कॉकरोच’’ से करते हुए शुक्रवार को कहा कि वे आगे चलकर मीडिया, सोशल मीडिया और आरटीआई कार्यकर्ता बन जाते हैं और फिर व्यवस्था पर हमला शुरू कर देते हैं।

सीजेआई सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा हासिल करने के लिए ‘‘प्रयासरत’’ रहने पर एक वकील को फटकार लगाते हुए यह टिप्पणी की।

पीठ ने कहा कि समाज में पहले से ही ऐसे ‘‘परजीवी’’ मौजूद हैं जो व्यवस्था पर हमला करते हैं और पूछा कि क्या याचिकाकर्ता भी उनके साथ जुड़ना चाहता है।

पीठ ने याचिकाकर्ता वकील से कहा, ‘‘पूरी दुनिया वरिष्ठ अधिवक्ता बनने की पात्र हो सकती है, लेकिन कम से कम आप इसके पात्र नहीं हैं।’’

सीजेआई ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि दिल्ली उच्च न्यायालय याचिकाकर्ता को वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा प्रदान भी कर दे, तो शीर्ष अदालत उसके पेशेवर आचरण को देखते हुए उसे रद्द कर देगी। सीजेआई ने फेसबुक पर याचिकाकर्ता द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा, ‘‘समाज में पहले से ही ऐसे परजीवी हैं जो व्यवस्था पर हमला करते हैं और आप उनके साथ जुड़ना चाहते हैं?’’

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, ‘‘कुछ युवा कॉकरोच की तरह होते हैं, जिन्हें न कोई रोजगार मिलता है और न ही किसी पेशे में उनका कोई स्थान होता है। उनमें से कुछ मीडिया के क्षेत्र में जाते हैं, कुछ सोशल मीडिया कार्यकर्ता बनते हैं, कुछ सूचना का अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता और अन्य कार्यकर्ता बनते हैं और फिर वे हर किसी पर हमला करना शुरू कर देते हैं।’’

पीठ ने याचिकाकर्ता से यह भी पूछा कि क्या उसके पास कोई अन्य मुकदमा नहीं है।

पीठ ने सवाल किया, ‘‘क्या यह उस व्यक्ति का आचरण है जो वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित होने की इच्छा रखता है?’’

शीर्ष अदालत ने कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा किसी व्यक्ति को प्रदान किया जाता है, और इसके लिए प्रयास नहीं किया जाना चाहिए।

उच्चतम न्यायालय ने कहा, ‘‘आप इसके पीछे पड़े हुए हैं। क्या यह उचित लगता है?’’

अदालत ने यह भी पूछा कि क्या वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा एक तमगा है जिसे केवल सजावट के तौर पर रखना होता है।

पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि वह केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से उन कई लोगों की डिग्रियों की जांच कराने पर विचार कर रही है जो काला कोट पहनते हैं, क्योंकि उनकी डिग्रियों की प्रामाणिकता को लेकर गंभीर संदेह हैं।

अदालत ने कहा कि इस मुद्दे पर भारतीय विधिक परिषद कभी कुछ नहीं करेगी क्योंकि उन्हें ‘‘अपने वोट चाहिए’’।

इसके बाद याचिकाकर्ता ने पीठ से माफी मांगी और याचिका वापस लेने की अनुमति चाही। पीठ ने याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी।

भाषा रवि कांत रवि कांत नरेश

नरेश


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