सोरेन ने जनगणना में आदिवासियों के लिए ‘सरना’ धर्म के प्रावधान का अनुरोध किया

सोरेन ने जनगणना में आदिवासियों के लिए ‘सरना’ धर्म के प्रावधान का अनुरोध किया

सोरेन ने जनगणना में आदिवासियों के लिए ‘सरना’ धर्म के प्रावधान का अनुरोध किया
Modified Date: May 3, 2026 / 08:25 pm IST
Published Date: May 3, 2026 8:25 pm IST

रांची, तीन मई (भाषा) झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रविवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर जनगणना में आदिवासी समुदाय के लिए ‘सरना धर्म’ का अलग प्रावधान करने की मांग की।

सोरेन ने कहा कि आदिवासियों की अलग पहचान सुनिश्चित करने और उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए सरना धार्मिक कोड जरूरी है।

सोरेन ने बताया कि 2011 की जनगणना में सरना के लिए अलग श्रेणी नहीं होने के बावजूद 21 राज्यों में करीब 50 लाख लोगों ने धर्म के कॉलम में खुद को ‘सरना’ बताया था।

मुख्यमंत्री ने आगामी जनगणना में आदिवासी समुदाय के भावनात्मक जुड़ाव को देखते हुए सरना धर्म के लिए अलग कोड उपलब्ध कराने का आग्रह किया।

उन्होंने लिखा कि उन्हें उम्मीद है कि जनगणना के दूसरे चरण में सरकार राज्य की आकांक्षाओं, विधानसभा के प्रस्ताव और आदिवासी समाज की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस मांग पर गंभीरता से विचार करेगी।

सोरेन ने नीति-निर्माण और संतुलित विकास के लिए सटीक और तथ्यों पर आधारित आंकड़ों के महत्व पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि झारखंड जनगणना प्रक्रिया में पूरा सहयोग कर रहा है। जनगणना मूल रूप से 2021 में होनी थी लेकिन बाद में टल गई थी।

उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में आदिवासी सरना धर्म को मानते हैं, जो प्रकृति पूजा, ग्राम देवताओं और विशिष्ट परंपराओं पर आधारित है।

सोरेन ने कहा कि जनगणना में सरना धर्म को उचित मान्यता मिलने से आदिवासी समुदाय के लिए कल्याणकारी नीतियां और संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

भाषा जोहेब रंजन

रंजन


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