बेंगलुरु, 20 सितंबर (भाषा) कर्नाटक विधानमंडल का तीन दिवसीय विशेष सत्र 21 सितंबर से शुरू होगा, जिसमें राज्य में सूखे की स्थिति और पश्चिमी घाट के पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्रों पर कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर चर्चा की जाएगी।
कस्तूरीरंगन रिपोर्ट का विरोध करने के मुद्दे पर सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी दल भाजपा एवं जद (एस) के बीच बड़े पैमाने पर सहमति बन सकती है। हालांकि, केंद्र की ओर से मसौदा अधिसूचना जारी किए जाने को लेकर आरोप-प्रत्यारोप हो सकते हैं।
सूखे के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है। भाजपा और जद (एस) ने सरकार पर स्थिति से निपटने में विफल रहने और प्रभावित किसानों को उचित राहत मुहैया नहीं कराने का आरोप लगाया है। वहीं, कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर पर्याप्त सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया है।
यह विशेष सत्र इसलिए बुलाया गया है, क्योंकि पिछले महीने हुए मानसून सत्र में विधानमंडल सूखे की स्थिति और पश्चिमी घाट के पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्र को लेकर केंद्र की मसौदा अधिसूचना पर राज्य की प्रतिक्रिया पर चर्चा नहीं कर सका था।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने रविवार को सकलेशपुर में संवाददाताओं से कहा कि सरकार ने कस्तूरीरंगन रिपोर्ट सहित लोगों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए विधानमंडल का विशेष सत्र बुलाया है।
उन्होंने कहा कि दोनों सदनों के सदस्यों को इस मामले पर अपने विचार रखने का अवसर दिया जाएगा।
भाषा शफीक पारुल
पारुल