भगवद् गीता की आध्यात्मिक शिक्षाएं आज के युवाओं को नई दिशा दे सकती हैं: राष्ट्रपति मुर्मू

भगवद् गीता की आध्यात्मिक शिक्षाएं आज के युवाओं को नई दिशा दे सकती हैं: राष्ट्रपति मुर्मू

भगवद् गीता की आध्यात्मिक शिक्षाएं आज के युवाओं को नई दिशा दे सकती हैं: राष्ट्रपति मुर्मू
Modified Date: February 26, 2026 / 03:42 pm IST
Published Date: February 26, 2026 3:42 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

जमशेदपुर, 26 फरवरी (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बृहस्पतिवार को कहा कि भगवद् गीता की आध्यात्मिक शिक्षाएं आज के युवाओं को एक नई दिशा दे सकती हैं और उनके जीवन को संवार सकती हैं।

मुर्मू, झारखंड के जमशेदपुर के कदमा क्षेत्र में श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक धर्मार्थ केंद्र न्यास के शिलान्यास समारोह के बाद एक सभा को संबोधित कर रही थीं।

उन्होंने कहा कि प्रस्तावित जगन्नाथ सांस्कृतिक केंद्र भगवद् गीता से प्राप्त शिक्षाओं का प्रसार करेगा।

मुर्मू ने कहा, “जमशेदपुर में भगवान जगन्नाथ मंदिर आध्यात्मिक शिक्षा और सांप्रदायिक सद्भाव का केंद्र होगा। यहां छात्रावास में लड़कियों सहित गरीब बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित होगी।”

राष्ट्रपति ने कहा कि भगवद् गीता में निहित शिक्षाएं आत्मिक पोषण हैं। मुर्मू ने प्रस्तावित आध्यात्मिक केंद्र के निर्माण में योगदान देने वालों की भी सराहना की।

उन्होंने इस बारे में कहा कि यह युवाओं में भगवद् गीता की शिक्षाओं को आत्मसात करने और उनके व्यक्तित्व को आकार देने में मदद करेगा।

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस अवसर पर कहा कि अब तक देशभर में 500 से अधिक जगन्नाथ मंदिर बनाए जा चुके हैं।

श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परमार्थ केंद्र न्यास के प्रबंध न्यासी और उद्योगपति एस. के. बेहरा ने बताया कि प्रस्तावित आध्यात्मिक केंद्र ओडिशा के पुरी स्थित 12वीं शताब्दी के जगन्नाथ मंदिर की प्रतिकृति होगा।

इसे खरखाई नदी के किनारे 2.5 एकड़ भूमि पर लगभग 100 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से विकसित किया जाएगा।

इस परियोजना से झारखंड में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है और यह युवा पीढ़ी के चरित्र निर्माण व नैतिक विकास के केंद्र के रूप में भी कार्य करेगा।

भाषा जितेंद्र पवनेश

पवनेश


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