बाल तस्करी के बढ़ते मामलों को गंभीरता से लें राज्य, समन्वित कार्रवाई की जाए: उच्चतम न्यायालय

Ads

बाल तस्करी के बढ़ते मामलों को गंभीरता से लें राज्य, समन्वित कार्रवाई की जाए: उच्चतम न्यायालय

  •  
  • Publish Date - April 9, 2026 / 02:17 PM IST,
    Updated On - April 9, 2026 / 02:17 PM IST

नयी दिल्ली, नौ अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बाल तस्करी के बढ़ते मामलों पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि ऐसा करने वाले गिरोह देशभर में सक्रिय हैं और यदि राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों ने तत्काल कदम नहीं उठाए तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाएगी।

न्यायालय ने कहा कि इस संबंध में केवल राज्य सरकार और उसका गृह विभाग ही सतर्कता के साथ कार्रवाई कर सकता है।

न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ ने बुधवार को एक याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा, ‘‘एक न्यायालय के रूप में हम निगरानी कर सकते हैं, लेकिन कार्रवाई अंततः राज्य सरकार, पुलिस और अन्य एजेंसियों को ही करनी है इसलिए यह हमारा विनम्र अनुरोध है।’’

पीठ ने संगठित तस्करी गिरोह को ध्वस्त करने के उद्देश्य से 2025 में सुनाए गए एक फैसले को लागू करने के मामले में कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ‘‘ढुलमुल’’ रवैये पर नाराजगी जताई।

न्यायमूर्ति विश्वनाथन ने कहा कि कुछ मामलों में बच्चों को बरामद किया जाना इस बात का प्रमाण है कि इस समस्या से निपटा जा सकता है लेकिन इसके लिए जिस स्तर की राजनीतिक और प्रशासनिक इच्छाशक्ति चाहिए उसका फिलहाल अभाव है।

पिछले साल 15 अप्रैल को दिए गए फैसले में कई संस्थागत सुधारों का निर्देश दिया गया था। इनमें तस्करी के मामलों में मुकदमों का निपटारा रोजाना सुनवाई के आधार पर छह महीने के भीतर पूरा करने का निर्देश भी शामिल था।

फैसले में मानव तस्करी निरोधक इकाइयों (एएचटीयू) को मजबूत करने और जांच के मानकों में सुधार करने का भी निर्देश दिया गया था।

इससे पहले पीठ ने कुछ राज्यों की ओर से दाखिल अनुपालन रिपोर्ट को ‘‘महज आंखों में धूल झोंकना’’ करार दिया था।

पीठ ने बुधवार को कहा कि मध्य प्रदेश, गोवा, हरियाणा, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा और पंजाब ने अब भी निर्धारित प्रारूप में रिपोर्ट दाखिल नहीं की।

जब मध्य प्रदेश के गृह सचिव ने इस चूक के लिए माफी मांगी तो पीठ ने ‘‘अंतिम अवसर’’ दिया और चेतावनी भी दी कि बार-बार विफल रहने पर राज्यों को आधिकारिक रूप से ‘‘आदेश का पालन नहीं करने वाला’’ घोषित कर दिया जाएगा।

पीठ ने कहा कि कम से कम 15 राज्य ऐसे हैं जिन्होंने मानव तस्करी की आशंका वाले क्षेत्रों की पहचान और निगरानी के लिए अनिवार्य समीक्षा समितियों का गठन अभी तक नहीं किया है।

इस मामले में आगे की सुनवाई 29 अप्रैल को होगी।

भाषा

सिम्मी मनीषा

मनीषा