राज्यों ने केंद्र से वन संरक्षण कानूनों में संशोधन करके घास के मैदानों की रक्षा करने का आग्रह किया

राज्यों ने केंद्र से वन संरक्षण कानूनों में संशोधन करके घास के मैदानों की रक्षा करने का आग्रह किया

राज्यों ने केंद्र से वन संरक्षण कानूनों में संशोधन करके घास के मैदानों की रक्षा करने का आग्रह किया
Modified Date: April 23, 2026 / 03:33 pm IST
Published Date: April 23, 2026 3:33 pm IST

नयी दिल्ली, 23 अप्रैल (भाषा) कर्नाटक, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और जम्मू कश्मीर ने भारत के वन संरक्षण कानूनों में संशोधन कर घास के मैदानों (ग्रासलैंड) के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया है।

राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति (एससी-एनबीडब्ल्यूएल) की हालिया बैठक में इन राज्यों ने इस बात पर जोर दिया कि वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम, 1980 के तहत दिशानिर्देशों में उपयुक्त संशोधन/स्पष्टीकरण की आवश्यकता हो सकती है, ताकि प्रतिपूरक वनीकरण तंत्र के अंतर्गत घास के मैदानों की पुनर्स्थापना को सक्षम बनाया जा सके या मान्यता दी जा सके।

बैठक के विवरण के अनुसार, राज्यों ने कहा कि चारागाह एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र हैं, जिन्हें संरक्षण और पुनर्स्थापन की आवश्यकता है। साथ ही संरक्षण प्राथमिकताओं, पशुओं के चरने की जरूरतों और आजीविका पर निर्भरता के बीच संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है।

प्रतिपूरक वनीकरण एक कानूनी व्यवस्था है, जिसके तहत गैर-वन उपयोग के लिए वन भूमि के उपयोग की भरपाई के तौर पर वनीकरण गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाता है।

हाल के वर्षों में घास के मैदानों के कुछ हिस्सों के पुनरुद्धार करने के प्रयास किए गए हैं। वर्ष 2019 में गुजरात वन विभाग के ‘बन्नी ग्रासलैंड डिवीजन’ ने बन्नी ग्रासलैंड पुनर्स्थापन परियोजना शुरू की थी, जिसके तहत अत्यधिक तेजी से फैलने वाली लकड़ीदार झाड़ी ‘प्रोसोपिस जुलीफ्लोरा’ को उखाड़ा गया।

भाषा गोला वैभव

वैभव


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