राष्ट्रपति भवन में ब्रिटिश वास्तुकार लुटियंस की प्रतिमा की जगह सी. राजगोपालाचारी की प्रतिमा लगेगी

राष्ट्रपति भवन में ब्रिटिश वास्तुकार लुटियंस की प्रतिमा की जगह सी. राजगोपालाचारी की प्रतिमा लगेगी

राष्ट्रपति भवन में ब्रिटिश वास्तुकार लुटियंस की प्रतिमा की जगह सी. राजगोपालाचारी की प्रतिमा लगेगी
Modified Date: February 22, 2026 / 05:39 pm IST
Published Date: February 22, 2026 5:39 pm IST

नयी दिल्ली, 22 फरवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को घोषणा की कि राष्ट्रपति भवन में स्थापित ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस की प्रतिमा की जगह स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय गवर्नर-जनरल सी. राजगोपालाचारी की प्रतिमा लगायी जाएगी।

अपने मासिक रेडियो संबोधन ‘मन की बात’ में मोदी ने कहा कि दुर्भाग्य से, स्वतंत्रता के बाद भी राष्ट्रपति भवन में ब्रिटिश प्रशासकों की मूर्तियां बनी रहीं, जबकि देश के महान सपूतों की मूर्तियों को वहां स्थान देकर सम्मानित नहीं किया गया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश गुलामी के प्रतीकों को पीछे छोड़कर भारत की संस्कृति से जुड़ी चीजों को महत्व देने लगा है।

उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति भवन में ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस की एक प्रतिमा भी स्थापित थी। अब इस प्रतिमा के स्थान पर राजाजी (सी. राजगोपालाचारी) की प्रतिमा लगाई जाएगी।”

मोदी ने उल्लेख किया कि आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान उन्होंने लाल किले से ‘पंच प्रणों’ की बात कही थी। उनमें से एक है, गुलामी की मानसिकता से मुक्ति।

उन्होंने कहा कि इस दिशा में राष्ट्रपति भवन ने भी एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राष्ट्रपति भवन में 23 फरवरी को ‘राजाजी उत्सव’ मनाया जाएगा। इस अवसर पर राष्ट्रपति भवन के केन्द्रीय प्रांगण में सी. राजगोपालाचारी की प्रतिमा का अनावरण किया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने कहा, “राजगोपालचारी उन लोगों में थे, जिन्होंने सत्ता को पद की तरह नहीं, सेवा की तरह देखा। सार्वजनिक जीवन में उनका आचरण, आत्मसंयम और स्वतंत्र चिंतन, आज भी हमें प्रेरित करता है।”

इसके साथ ही राजाजी उत्सव के दौरान राजगोपालाचारी पर आधारित प्रदर्शनी भी लगेगी। ये प्रदर्शनी 24 फरवरी से एक मार्च तक जारी रहेगी। मोदी ने कहा, “मौका निकालकर आप भी इसे देखने जरूर जाइए।”

एडविन लुटियंस ने सर हर्बर्ट बेकर के सहयोग से नयी दिल्ली में कई भव्य व ऐतिहासिक इमारतों का डिजाइन तैयार किया, जिनमें राष्ट्रपति भवन, नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक और इंडिया गेट शामिल हैं।

उनके योगदान को मान्यता देते हुए, नयी दिल्ली के एक हिस्से को ‘लुटियंस दिल्ली’ के नाम से भी जाना जाता है।

भाषा प्रशांत दिलीप

दिलीप

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