होर्मुज जलडमरूमध्य संकट: भारत निर्बाध ऊर्जा पारगमन के लिए वैश्विक प्रयासों में शामिल हुआ
होर्मुज जलडमरूमध्य संकट: भारत निर्बाध ऊर्जा पारगमन के लिए वैश्विक प्रयासों में शामिल हुआ
नयी दिल्ली, दो अप्रैल (भाषा) विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बृहस्पतिवार को पश्चिम एशिया में संकट को हल करने के लिए कूटनीति की ओर लौटने का आह्वान किया।
मिसरी ने ब्रिटेन में आयोजित 60 से अधिक देशों की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य अस्थिर होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से वैश्विक जहाजरानी मार्गों को सुरक्षित करना था।
ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में की गई आंशिक नाकेबंदी के बीच मिसरी ने डिजिटल माध्यम से चर्चा में भाग लेते हुए क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिवहन मार्गों की सुरक्षा पर नयी दिल्ली का रुख स्पष्ट किया। इस आंशिक नाकेबंदी से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, विदेश सचिव ने बैठक के दौरान संबोधन में अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से निर्बाध आवागमन और नौवहन की स्वतंत्रता के सिद्धांतों के महत्व पर जोर दिया।
मंत्रालय ने बताया कि मिसरी ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर संकट के प्रभाव और इस तथ्य पर बल दिया कि खाड़ी में व्यापारिक जहाजों पर हमलों में नाविकों को खोने वाला भारत एकमात्र देश है।
विदेश मंत्रालय ने एक संक्षिप्त बयान में बताया, “उन्होंने (मिसरी ने) इस बात पर भी जोर दिया कि संकट से निकलने का एकमात्र रास्ता तनाव कम करना और सभी संबंधित पक्षों के बीच कूटनीति और संवाद के मार्ग पर लौटना है।”
ईरान द्वारा फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित संकरे होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग अवरुद्ध कर दिए जाने के बाद वैश्विक तेल व गैस की कीमतों में उछाल आया है। इस जलडमरूमध्य से वैश्विक तेल और एलएनजी का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा होकर गुजरता है। पश्चिम एशिया भारत की ऊर्जा खरीद का एक प्रमुख स्रोत रहा है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अपने साप्ताहिक प्रेसवार्ता में कहा, “भारत के संदर्भ में, आप भली-भांति जानते हैं कि हम स्वतंत्र और खुले वाणिज्यिक जहाजरानी के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप समुद्री सुरक्षा के पक्षधर हैं।”
उन्होंने कहा, “हम होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित और निर्बाध नौवहन सुनिश्चित करने की अपनी प्राथमिकता पर कायम हैं।”
जायसवाल ने कहा कि ब्रिटेन ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर वार्ता के लिए भारत सहित कई देशों को आमंत्रित किया था और मिसरी ने इसमें भाग लिया था।
उन्होंने कहा, “हम ईरान व अन्य देशों के संपर्क में हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि एलपीजी और एलएनजी सहित उत्पादों को ले जाने वाले हमारे जहाजों के लिए निर्बाध व सुरक्षित पारगमन कैसे सुनिश्चित किया जा सकता है।”
जायसवाल ने कहा, “पिछले कुछ दिनों में हुई बातचीत के बाद भारतीय ध्वज वाले छह जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से पार करने में सक्षम हुए हैं। हम इस मामले पर संबंधित पक्षों के साथ लगातार संपर्क में हैं।”
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत पश्चिम एशिया संघर्ष से संबंधित सभी घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रखे हुए है।
होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों के आवागमन में व्यवधान को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंताएं बढ़ रही हैं और कई प्रमुख शक्तियां जलमार्ग को पूरी तरह से खोलने के लिए दबाव डाल रही हैं। ईरान ने अपने मित्र देशों के जहाजों को जलमार्ग से गुजरने की अनुमति दे दी है।
भाषा जितेंद्र अमित
अमित

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