पंजाब में सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल; सार्वजनिक सेवाएं प्रभावित, ओपीडी सेवाओं पर भी असर

पंजाब में सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल; सार्वजनिक सेवाएं प्रभावित, ओपीडी सेवाओं पर भी असर

पंजाब में सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल; सार्वजनिक सेवाएं प्रभावित, ओपीडी सेवाओं पर भी असर
Modified Date: August 27, 2026 / 05:40 pm IST
Published Date: August 27, 2026 5:40 pm IST

होशियारपुर, 27 अगस्त (भाषा) पंजाब में तीन लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों ने लंबित महंगाई भत्ते (डीए) को जारी करने सहित अपनी विभिन्न मांगों को लेकर बृहस्पतिवार को राज्यव्यापी हड़ताल की।

हड़ताल के कारण विभिन्न सरकारी विभागों का कामकाज प्रभावित हुआ और अस्पतालों में बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) की सेवाएं भी बाधित रहीं।

मुख्यमंत्री भगवंत मान को पहले जालंधर में कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ उनकी मांगों और समस्याओं पर चर्चा करने के लिए बैठक करनी थी। हालांकि, उन्होंने हड़ताल कर रहे कर्मचारियों से स्पष्ट कर दिया कि बातचीत तभी होगी, जब वे अपनी हड़ताल खत्म कर देंगे।

मान ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “कर्मचारी हमारे परिवार का अहम हिस्सा हैं और उनकी हर जायज मांग सुनने के लिए हम तैयार हैं। लेकिन बातचीत और हड़ताल एक साथ नहीं चल सकतीं। सरकार हर समस्या का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन बातचीत तभी होगी, जब हड़ताल खत्म की जाएगी।”

पंजाब सांझा मुलाजिम मंच के बैनर तले 150 से अधिक कर्मचारी संगठनों ने अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को पूरा कराने के लिए राज्य सरकार पर दबाव बनाने के उद्देश्य से ‘महा हड़ताल’ में हिस्सा लिया।

हड़ताल में 3.50 लाख से अधिक पेंशनभोगी भी शामिल हैं।

सरकारी कर्मचारियों की यह हड़ताल सत्तारूढ़ सरकार के खिलाफ सबसे बड़े प्रदर्शनों में से एक मानी जा रही है। खासतौर पर राज्य विधानसभा चुनाव से पहले अपनी मांगों के समर्थन में कर्मचारियों की यह हड़ताल महत्वपूर्ण है।

प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने जिला मुख्यालयों और अन्य जगहों पर भी धरना-प्रदर्शन किया और भगवंत मान सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

राज्य सरकार के ‘आम आदमी क्लीनिक’ फिरोजपुर में बंद रहे।

कर्मचारी संगठनों के अनुसार, सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं बंद रहीं, जिससे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

होशियारपुर में पंजाब सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (पीसीएमएसए) ने विरोध प्रदर्शन का समर्थन करते हुए सिविल अस्पताल होशियारपुर और जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) सेवाओं का बहिष्कार किया।

पीसीएमएसए के जिला अध्यक्ष डॉ. कुलतार सिंह और महासचिव डॉ. मुनीश कुमार ने बताया कि प्रदर्शन के कारण नियोजित सर्जरी टाल दी गईं। उन्होंने कहा कि आपातकालीन सेवाएं, प्रसूति एवं शिशु देखभाल सेवाएं, आपातकालीन सर्जरी, पहले से भर्ती मरीजों का इलाज, मेडिको-लीगल और पोस्टमार्टम से जुड़े कार्य तथा एमएलसी कार्य सामान्य रूप से जारी रहे।

पंजाब के होशियारपुर जिले में सरकारी स्कूल बंद रहे, क्योंकि शिक्षकों और लिपिकीय कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से आकस्मिक अवकाश लिया। यह जानकारी पुरानी पेंशन बहाली संघर्ष समिति पंजाब के संयोजक और सरकारी शिक्षक संघ पंजाब के सचिव जसवीर सिंह तलवाड़ा ने दी।

सरकारी कॉलेज, होशियारपुर में भी छात्रों की उपस्थिति कम रही, क्योंकि लगभग सभी नियमित शिक्षक और लिपिकीय कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से आकस्मिक अवकाश लिया। यह जानकारी सरकारी कॉलेज प्राध्यापक संघ के अध्यक्ष अमृत समरा ने दी।

अधिकारियों ने बताया कि तदर्थ कर्मचारी (एडहॉक स्टाफ) ड्यूटी पर मौजूद रहे।

अमृतसर के गुरु नानक देव अस्पताल में चिकित्सकों ने अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया। अस्पताल में प्रदर्शन कर रहे एक चिकित्सक ने बताया कि ओपीडी सेवाएं बंद रहीं, जबकि आपातकालीन सेवाएं चालू रहीं।

होशियारपुर में उपायुक्त कार्यालय, एसडीएम और तहसील कार्यालय, शिक्षा विभाग, सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), बागवानी विभाग, कृषि विभाग, सिविल सर्जन कार्यालय, जिला उद्योग केंद्र, जल आपूर्ति एवं स्वच्छता विभाग, आबकारी विभाग और कोषागार विभाग समेत कई अन्य विभागों के कर्मचारियों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया।

यहां जिला प्रशासनिक परिसर के बाहर विरोध रैली भी निकाली गई, जहां विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में और उन्हें कथित तौर पर लंबे समय से लंबित रखने के लिए राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

‘रिटायर्ड पेंशनर्स यूनियन’ के सदस्य रविंदर लूथरा ने कहा कि आम आदमी पार्टी (आप) ने चुनाव से पहले कई वादे किए थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्हें पूरा करने में “विफल” रही।

उन्होंने कहा, “चुनाव से पहले सरकार ने कर्मचारियों से बड़े-बड़े वादे किए थे। उसने पुरानी पेंशन योजना बहाल करने, आउटसोर्सिंग खत्म करने और छठे वेतन आयोग को लागू करने समेत कई मांगों को पूरा करने का वादा किया था। इतना समय बीत गया, लेकिन ऐसा लगता है कि सरकार अपने वादों को भूल गई है।”

इसी तरह के प्रदर्शन लुधियाना, फगवाड़ा और जालंधर समेत राज्य के अन्य हिस्सों में भी देखने को मिले।

हड़ताल के दौरान सरकारी बस सेवाएं सामान्य रूप से संचालित होती रहीं।

भाषा तान्या मनीषा

मनीषा


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