परीक्षा की सुरक्षा से जुड़ी चिंता को दूर करने के लिए एनटीए में ढांचागत सुधार की जरूरत:यूजीसी के पूर्व अध्यक्ष

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परीक्षा की सुरक्षा से जुड़ी चिंता को दूर करने के लिए एनटीए में ढांचागत सुधार की जरूरत:यूजीसी के पूर्व अध्यक्ष

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  • Publish Date - August 22, 2026 / 07:09 PM IST,
    Updated On - August 22, 2026 / 07:09 PM IST

नयी दिल्ली, 22 अगस्त (भाषा) विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के पूर्व अध्यक्ष एम जगदीश कुमार ने कहा है कि परीक्षा की सुरक्षा संबंधी बार-बार सामने आने वाली चिंताओं को दूर करने के लिए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में ‘गहन ढांचागत सुधार’ की आवश्यकता है, लेकिन एजेंसी को पूरी तरह से बदलना सबसे उपयोगी समाधान नहीं हो सकता है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की समीक्षा समिति के अध्यक्ष कुमार ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि एनटीए द्वारा आयोजित परीक्षाओं के बड़े पैमाने और जटिलता को देखते हुए, बार-बार होने वाले पेपर-लीक की चिंताओं को ‘परीक्षा-सुरक्षा की पूरी प्रक्रिया से जुड़ी चुनौती’ के तौर पर देखा जाना चाहिए।

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) के प्रश्नपत्र लीक के मामले और उसके बाद यूजीसी नेट की परीक्षा में हुई गड़बड़ियों के चलते, केंद्र सरकार ने हाल में एनटीए और परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाने के आदेश दिए हैं।

नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक को लेकर बड़े पैमाने पर छात्रों ने विरोध किया और एक मंत्री को इस्तीफ़ा देना पड़ा।

सरकार ने ‘टेक्नोक्रेट’ नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय समिति भी गठित की है, जबकि हाल में संसद सत्र में सरकारी परीक्षाओं में अनुचित साधनों पर रोक लगाने और कड़ी सज़ा का प्रावधान करने वाला एक कानून पारित किया गया है।

कुमार ने कहा, ‘‘ एनटीए हर साल एक करोड़ से अधिक अभ्यर्थियों के लिए परीक्षाएं आयोजित करती है। इतने बड़े स्तर पर परीक्षा की सुरक्षा विषय के विशेषज्ञों, डिजिटल सिस्टम, प्रिंटर, परिवहन, भंडारण, परीक्षा केंद्रों, निरीक्षकों और सेवा प्रदाताओं पर निर्भर करती है।’’

उन्होंने कहा कि राधाकृष्णन समिति ने पूरी परीक्षा प्रक्रिया की जांच की थी और बेहतर मानक संचालन प्रक्रिया, डेटा की बेहतर सुरक्षा, स्पष्ट ज़िम्मेदारी और राज्यों के साथ बेहतर तालमेल की सिफारिश की थी।

कुमार ने कहा,‘‘सरकार और एनटीए ने तब से कई सुझाए गए उपाय लागू किए हैं। इसका लंबे समय का समाधान है – लगातार जोखिम का आकलन करना, गोपनीय सामग्री को संभालने वाले लोगों की संख्या कम करना, हर चरण के डिजिटल रिकॉर्ड पर नजर रखना और हर चरण की स्वतंत्र जांच।’’

जब उनसे पूछा गया कि क्या एनटीए पर बहुत ज़्यादा परीक्षाओं का बोझ आ गया है, तो कुमार ने कहा कि उसका काम का बोझ ‘बहुत ज़्यादा’ है, लेकिन सिर्फ परीक्षाओं की संख्या से यह साबित नहीं होता कि एजेंसी पर बोझ बहुत अधिक है।

उन्होंने कहा, ‘‘असली मुद्दा हर परीक्षा से जुड़ी जटिलता है।’’

उन्होंने कहा कि राधाकृष्णन समिति ने एक साझेदारी मॉडल का सुझाव दिया था, जिसमें परीक्षा कराने वाले मंत्रालय, नियामकों या संस्थाओं को पाठ्यक्रम, विषय के जानकारों, सवालों की गुणवत्ता और अकादमिक सत्यापन की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि एनटीए सुरक्षित मंच, सेंटर नेटवर्क, प्रत्याशी सत्यापन, परीक्षा आयोजित करने और परिणाम ‘प्रोसेस’ करने की सुविधा दे सकता है।

इस सवाल पर कि क्या अलग-अलग परीक्षाओं को अलग-अलग एजेंसियों द्वारा संभाला जाना चाहिए, कुमार ने कहा कि वह सिर्फ काम का बोझ कम करने के लिए परीक्षाओं को कई एजेंसियों में बांटने की सलाह नहीं देंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘एक ही राष्ट्रीय परीक्षा निकाय साझा सुरक्षा मानक, प्रौद्योगिकी, अभ्यर्थी और परिणाम प्रक्रिया से जुड़ी सुविधा देती है। कई नई एजेंसियां ​​बनाने से लागत बढ़ सकती है और सुरक्षा के इंतजाम एक जैसे नहीं रह पाएंगे।’’

कुमार ने कहा कि पूरी परीक्षा प्रणाली की व्यापक समीक्षा की ज़रूरत है, जिसमें प्रश्न तैयार करना, अनुवाद, समीक्षा, डिजिटल भंडारण, प्रिंटिंग या ट्रांसमिशन, परीक्षा केंद्र और निगरानी शामिल हैं।

कुमार ने तीन ऐसे सुधारों की पहचान की जिन्हें तत्काल प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

पहला, पूरे परीक्षा चक्र को सुरक्षित करना, स्थायी पेशेवर क्षमता का निर्माण करना और परीक्षा केंद्रों तथा अभ्यर्थी संबंधी सेवाओं को भरोसेमंद बनाना।

परीक्षा की सुरक्षा के संबंध में उन्होंने कहा कि प्रश्नों के चयन, अनुवाद और समीक्षा से लेकर उनके भंडारण, प्रिंटिंग या डिजिटल रूप से उनके भेजे जाने तथा परीक्षा केंद्र पर उनके प्रबंधन तक, हर चरण में किसी भी प्रकार की पहुंच या बदलाव का सुरक्षित रिकॉर्ड तैयार होना चाहिए।

उन्होंने कहा, “प्रश्नपत्र की जांच की नई चार-स्तरीय व्यवस्था को सीमित पहुंच, ‘कूटबद्धता’ और स्वतंत्र सुरक्षा परीक्षण के साथ जोड़ा जाना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि दूसरी प्राथमिकता टेस्ट डिजाइन, साइबर सुरक्षा, भाषाओं, गुणवत्ता विश्लेषण, लॉजिस्टिक्स और अभ्यर्थियों के साथ संवाद जैसे क्षेत्रों में स्थायी पेशेवर क्षमता विकसित करना होना चाहिए।

कुमार ने कहा कि तीसरी प्राथमिकता भरोसेमंद परीक्षा केंद्रों और अभ्यर्थी संबंधी सेवाओं को सुनिश्चित करना होना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘मान्यता प्राप्त परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी निगरानी, बायोमेट्रिक सत्यापन, विश्वसनीय बिजली आपूर्ति, इंटरनेट कनेक्टिविटी, सुगम पहुंच और प्रशिक्षित कर्मचारियों की व्यवस्था होनी चाहिए।”

भाषा राजकुमार संतोष

संतोष