चंद्र मिशन में शामिल न हो पाने की कसक रहेगी: सुनीता विलियम्स

चंद्र मिशन में शामिल न हो पाने की कसक रहेगी: सुनीता विलियम्स

चंद्र मिशन में शामिल न हो पाने की कसक रहेगी: सुनीता विलियम्स
Modified Date: January 23, 2026 / 12:11 pm IST
Published Date: January 23, 2026 12:11 pm IST

(माणिक गुप्ता)

(तस्वीरों के साथ जारी)

कोझिकोड, 23 जनवरी (भाषा) अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा से हाल में सेवानिवृत्त हुईं अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने कहा कि भले ही वह कई अंतरिक्ष मिशन का हिस्सा रही हैं, लेकिन आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत प्रस्तावित चंद्र मिशन में शामिल नहीं हो पाने की उन्हें कसक रहेगी।

विलियम्स ने यह भी कहा कि वह पृथ्वी की उन जगहों पर घूमने का आनंद ले रही हैं जिन्हें उन्होंने आसमान से देखा था।

केरल साहित्य महोत्सव (केएलएफ) में बृहस्पतिवार को ‘ड्रीम्स रीच ऑर्बिट’ (सपने कक्षा में पहुंचते हैं) शीर्षक वाले सत्र के दौरान विलियम्स ने कहा, ‘‘चांद पर कौन नहीं जाना चाहता… नासा में शामिल होने का मेरा मूल कारण यही था इसलिए बेशक, मुझे ‘फोमो’ (कुछ छूट जाने की कसक) होगी, लेकिन मैं अपने मित्रों को ऐसा करते देखने के लिए, अपने साथी मनुष्यों को यह कदम उठाते हुए देखने के लिए उत्साहित हूं।’’

नासा 1972 के बाद अपना पहला मानवयुक्त चंद्र मिशन आर्टेमिस-द्वितीय शुरू करने की तैयारी कर रहा है। चार अंतरिक्ष यात्री 2026 में चंद्रमा की कक्षा में जाएंगे।

विलियम्स ने कहा, ‘‘मैंने पृथ्वी पर भी कुछ वाकई शानदार जगहें खोजी हैं, जहां मैं तब नहीं गई थी जब मैं अंतरिक्ष में थी। मैं इन सभी जगहों पर घूमने की योजना बना रही हूं। केरल उनमें से एक है।’’

विलियम्स (60) ने 27 साल के अपने शानदार करियर के दौरान अंतरिक्ष में 608 दिन बिताए। यह नासा के किसी अंतरिक्ष यात्री द्वारा अंतरिक्ष में बिताए कुल समय के मामले में दूसरा स्थान है। अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा सबसे लंबी एकल अंतरिक्ष उड़ान भरने की सूची में वह नासा के अंतरिक्ष यात्री बुच विलमोर के साथ संयुक्त रूप से छठे स्थान पर है।

विलियम्स ने नौ ‘स्पेसवॉक’ (अंतरिक्ष में चहलकदमी) भी पूरी कीं जिनकी कुल अवधि 62 घंटे और छह मिनट रही। यह किसी महिला द्वारा सबसे अधिक समय तक ‘स्पेसवॉक’ का रिकॉर्ड है। कुल ‘स्पेसवॉक’ अवधि की सर्वकालिक सूची में उनका चौथा स्थान है।

शांत और फौलादी हौसले वाली विलियम्स अपनी उपलब्धियों को ‘‘असाधारण’’ नहीं मानतीं, यहां तक कि उस खतरनाक दौर को भी नहीं, जब अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन का उनका आठ-दिवसीय मिशन बोइंग स्टारलाइनर की उड़ान में दिक्कतें आने के बाद नौ महीने लंबा खिंच गया था।

विलियम्स ने कहा, ‘‘(इस दौरान) मेरे दिमाग में कभी डर का भाव आया ही नहीं। मुझे जमीन पर मौजूद लोगों पर भरोसा था। मुझे मेरे दोस्त एवं सहकर्मी बुच विलमोर पर भरोसा था, जो मेरे ठीक बगल में बैठे थे और उन्हें मुझ पर भरोसा था कि हम इस समस्या का समाधान कर लेंगे।’’

उन्होंने अंतरिक्ष में बिताए समय को याद करते हुए कहा, ‘‘मैं जब अपने ग्रह को देखती थी तो मुझे न सिर्फ उन सभी लोगों, परिवार और दोस्तों की धड़कन महसूस होती थी जिन्हें मैं जानती हूं, बल्कि उन जानवरों के प्रेम का भी एहसास होता था जिन्हें मैं प्यार करती हूं। …यह हमारा ग्रह है जहां वे रहते हैं, जहां मछलियां तैरती हैं, जहां सारे पेड़ उगते हैं। उनके बीच नहीं हो पाना… वह बहुत पीड़ादायक था।’’

अमेरिकी नौसेना की पूर्व कैप्टन विलियम्स का जन्म 19 सितंबर 1965 को अमेरिका में ओहायो के यूक्लिड में हुआ था। उनके पिता दीपक पंड्या गुजराती थे और मेहसाणा जिले के झुलासण के रहने वाले थे जबकि उनकी मां उर्सुलिन बोनी पंड्या स्लोवेनिया की थीं। विलियम्स ने खुद को बेटी के रूप में अपनाने के लिए भारत को धन्यवाद दिया।

विलियम्स ने अपने पहले अंतरिक्ष मिशन को याद करते हुए स्वीकार किया कि जब उनके पिता ने कहा था कि भारत के लोग उनकी सुरक्षित वापसी के लिए प्रार्थना कर रहे हैं तो शुरुआत में उन्हें इस बात पर संदेह हुआ था।

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने उनसे कहा, ‘मुझे विश्वास नहीं है। ऐसा नहीं हो सकता।’ और फिर जब मैं घर आई तो मैंने अखबारों में सचमुच खबरें देखीं और मुझे एहसास हुआ कि यह सच था। मेरा एक दोस्त हिमालय में एक प्राथमिक विद्यालय में था और उसने मुझे बताया, ‘हे भगवान, तुम्हारी तस्वीर स्कूल में लगी है’।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगा, वाह। यह मेरे लिए इतना आत्मीय, इतना सुखद है कि मुझे भारत की बेटी के रूप में अपनाया गया है।’’

भाषा सिम्मी वैभव

वैभव


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