शीर्ष अदालत ने ओडिशा में डीजीपी नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ी जनहित याचिका की सुनवाई टाली

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शीर्ष अदालत ने ओडिशा में डीजीपी नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ी जनहित याचिका की सुनवाई टाली

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  • Publish Date - August 18, 2026 / 08:14 PM IST,
    Updated On - August 18, 2026 / 08:14 PM IST

नयी दिल्ली, 18 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को उस जनहित याचिका की सुनवाई दो सितंबर के लिए टाल दी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि ओडिशा सरकार ‘प्रकाश सिंह मामले’ में शीर्ष अदालत के 2006 के निर्देशों का उल्लंघन करते हुए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) पद के लिए संभावित उम्मीदवारों की सूची में एक कम वरीयता वाले अधिकारी को शामिल करने की कोशिश कर रही थी।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ को ओडिशा सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सूचित किया कि राज्य सरकार ने जनहित याचिका पर अपना जवाब दाखिल कर दिया है।

पीठ ने कहा कि राज्य सरकार का जवाब रिकॉर्ड पर नहीं है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि वह राज्य सरकार का जवाब पढ़ना चाहेंगे।

इसके बाद पीठ ने याचिका की सुनवाई दो सितंबर के लिए टाल दी।

इससे पहले, शीर्ष अदालत ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) से कहा था कि वह ओडिशा के पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति के लिए संभावित अधिकारियों के नामों को 18 अगस्त तक अंतिम रूप न दे।

न्यायालय उस जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि राज्य सरकार डीजीपी पद के लिए संभावित उम्मीदवारों की सूची में एक कम वरीयता वाले अधिकारी को शामिल करने की कोशिश कर रही थी।

मौजूदा डीजीपी वाईबी खुरानिया को 16 अगस्त को पद छोड़ना था।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील पी. चिदंबरम ने पीठ को बताया था कि ओडिशा में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) रैंक के एक अधिकारी को पदोन्नत किया गया था।

‘प्रकाश सिंह’ मामले में 2006 के उच्चतम न्यायालय के फ़ैसले और उसके बाद दिए गए निर्देशों में कहा गया था कि राज्य के डीजीपी का चयन राज्य सरकार करेगी। यह चयन विभाग के उन तीन सबसे वरिष्ठ अधिकारियों में से किया जाएगा, जिन्हें संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने उस पद पर पदोन्नति के लिए चुना हो। यह चयन उनकी सेवा की अवधि, बहुत अच्छे रिकॉर्ड और पुलिस बल की कमान संभालने के अनुभव के आधार पर किया जाएगा।

इसमें यह भी कहा गया था कि एक बार जब किसी व्यक्ति को इस नौकरी के लिए चुन लिया जाए, तो उसका कार्यकाल कम से कम दो साल का होना चाहिए, भले ही उसकी सेवानिवृत्ति की तारीख़ कुछ भी हो।

भाषा

सुरेश माधव

माधव